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Pradhan Pravasi
Gorakhpurलगभग २ घंटे पहले

*खाकी के शहीदों को नमन, 1959 से अब तक के बलिदानियों को

*खाकी के शहीदों को नमन, 1959 से अब तक के बलिदानियों को

*खाकी के शहीदों को नमन, 1959 से अब तक के बलिदानियों को किया याद* *गोरखपुर पुलिस लाइन में पुलिस स्मृति दिवस पर वीर जवानों को श्रद्धांजलि, वरिष्ठ अधिकारियों ने अर्पित किए श्रद्धासुमन* *देश की रक्षा और जनसुरक्षा में जान गंवाने वाले पुलिसकर्मियों का बलिदान अमर* *शहीदों के शौर्य, साहस और कर्तव्यनिष्ठा को किया सलाम, उनकी शहादत पुलिस बल की ताकत* गोरखपुर। वर्दी सिर्फ जिम्मेदारी का प्रतीक नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर देश और समाज की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर देने का संकल्प भी है। इसी संकल्प को नमन करते हुए बुधवार को गोरखपुर पुलिस लाइन स्थित पुलिस स्मृति दिवस स्थल पर बलिदानी पुलिसकर्मियों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। वर्ष 1959 से अब तक कर्तव्य निर्वहन के दौरान अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर जवानों को याद किया गया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने स्मृति स्थल पर पुष्प अर्पित कर उनके अदम्य साहस, शौर्य और कर्तव्यनिष्ठा को नमन किया। कार्यक्रम ने एक बार फिर याद दिलाया कि देश और समाज की सुरक्षा के लिए पुलिसकर्मियों का सर्वोच्च बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। श्रद्धांजलि कार्यक्रम में एडीजी जोन राम कुमार, डीआईजी रेंज एस. चनप्पा, एसएसपी डॉ. कौस्तुभ, एसपी सिटी निमिष पाटिल, एसपी उत्तरी राजेश धुनावता, एसपी दक्षिणी दिनेश कुमार पुरी, एसपी पुलिस रेडियो गोरखपुर-वाराणसी जोन राम निवास सिंह यादव, एसपी रेलवे लक्ष्मी निवास मिश्र, एसपी एसएसएफ द्वितीय वाहिनी रवि, एसपी ट्रैफिक अमित श्रीवास्तव, सहायक पुलिस अधीक्षक एवं सीओ कैंट अरुण कुमार एस. समेत जनपद के विभिन्न सर्किलों के क्षेत्राधिकारी और अन्य पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। सभी ने स्मृति स्थल पर श्रद्धासुमन अर्पित कर बलिदानियों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त की। पुलिस स्मृति दिवस का इतिहास 21 अक्टूबर 1959 की उस घटना से जुड़ा है, जब लद्दाख के दुर्गम क्षेत्र में देश की सीमा की सुरक्षा में तैनात केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों ने चीनी सैनिकों के हमले का बहादुरी से मुकाबला किया था। इस संघर्ष में दस भारतीय पुलिसकर्मियों ने सर्वोच्च बलिदान दिया था। उन्हीं वीर जवानों की स्मृति में प्रत्येक वर्ष 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस मनाया जाता है। यह दिन पुलिस बल के उन सभी साथियों को याद करने का अवसर है, जिन्होंने कर्तव्य को सर्वोपरि रखते हुए अपनी जान की परवाह किए बिना मोर्चा संभाला और देश तथा समाज की सुरक्षा के लिए प्राण न्योछावर कर दिए। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश पुलिस के उन जवानों को भी स्मरण किया गया, जिन्होंने कर्तव्य पालन के दौरान अपना जीवन बलिदान कर दिया। विशेष रूप से 25 सितंबर 2025 से 31 अगस्त 2026 तक बलिदान देने वाले उत्तर प्रदेश पुलिस के जवानों के योगदान को याद किया गया। उनकी बहादुरी, त्याग और जनसेवा के प्रति समर्पण को नमन करते हुए यह संदेश दिया गया कि वर्दी की गरिमा और नागरिकों की सुरक्षा के लिए दिया गया उनका बलिदान हमेशा सम्मान के साथ याद रखा जाएगा। पुलिस की ड्यूटी महज कानून लागू करने तक सीमित नहीं है। अपराधियों से मुठभेड़, चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में कानून-व्यवस्था बनाए रखना, संकट में फंसे लोगों की सहायता करना और नागरिकों के जीवन तथा संपत्ति की सुरक्षा करना पुलिसकर्मियों के दायित्वों का हिस्सा है। इन जिम्मेदारियों को निभाते हुए कई जवान ऐसे जोखिमों का सामना करते हैं, जहां हर कदम पर जान का खतरा बना रहता है। इसके बावजूद वे अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटते। यही साहस और समर्पण पुलिस सेवा की असली पहचान है। पुलिस स्मृति दिवस पर बलिदानियों को श्रद्धांजलि देना केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि उनके अधूरे रह गए सपनों, परिवारों के त्याग और देश के प्रति उनके समर्पण को याद करने का अवसर भी है। शहीद जवानों की वीरता पुलिस बल के हर सदस्य को विपरीत परिस्थितियों में भी कर्तव्य के प्रति अडिग रहने की प्रेरणा देती है। उनकी शहादत यह संदेश देती है कि जनसुरक्षा और कानून के राज की रक्षा का दायित्व सर्वोपरि है। गोरखपुर पुलिस लाइन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान बलिदानी पुलिसकर्मियों के आदर्शों पर चलने और पूरी निष्ठा, ईमानदारी तथा साहस के साथ जनसेवा करने की भावना को दोहराया गया। स्मृति स्थल पर अर्पित श्रद्धासुमन उन वीर जवानों के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक बने, जिन्होंने देश और समाज की सुरक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उनकी शहादत खाकी की पहचान, पुलिस बल का गौरव और आने वाली पीढ़ियों के लिए राष्ट्रसेवा की अमिट प्रेरणा बनी रहेगी।

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