आज इस धरती पर एक अनूठे व्यक्तित्व का अंधेरी रात्रि कंस के

आज इस धरती पर एक अनूठे व्यक्तित्व का अंधेरी रात्रि कंस के कारागार में अवतरण हुआ।जो इस विराट चेतना का प्रस्फुटिकरण था।सारा जगत खासकर सनातनी हिन्दू जन मानस उन्हें कृष्ण के रुप में श्रद्धा व भक्ति से पूजते व स्मरण करते हैं।उन महान के मुख से निकली भगवत गीता सारे मनुष्यता की पथ प्रदीपिका है।कर्षति इति कृष्ण:।जो सबको जीवन के दलदल से खींच कर प्रकाश के तरफ ले चले वह है कृष्ण। कृष्ण सारे ब्राह्मान्डीय चेतना का आकर्षण है। अर्थात सारा ब्रह्माण्ड उसी में स्थित है। कृष्ण विराट चेतना है जो जीवन को प्रकृति के लय के साथ जोड़कर जीने की प्रेरणा देता है। कृष्ण निर्बन्ध जीवन जीने की कला है। कृष्ण संकटों में मुस्कराता पुष्प है। कृष्ण निष्काम कर्म का प्रतीक है। कृष्ण आदि गुरु शंकराचार्य की प्रस्थान त्रयी का प्रणेता है। कृष्ण निर्बन्ध,मुक्त अट्टहास है। इसीलिए उन्हें बहुत से नामों से जाना जाता है।गोपाल, जनार्दन,केशव, मुरलीधर, गोवर्धन धारी, चक्र सुदर्शन धारी,छलिया कृष्ण, रणछोड़ कृष्ण आदि आदि।आइये ऐसे मुक्ति दाता कृष्ण के गीता को पढ़ें,सुने,मनन करें।यही सच्ची कृष्ण जन्माष्टमी होगी। Dr Meenu Rai🙏