*शिव रूपी पुरुष एवं प्रकृति का मिलन ही शिव, पार्वती विवाह है, शास्त्री जी

हरपुर बुदहट गोरखपुर। बांसगांव संदेश हरपुर-बुदहट शिव रूपी पुरुष एवं प्रकृति रूप में पार्वती (शक्ति) का मिलन ही, शिव पार्वती विवाह है। इससे न केवल संसार का वरन आध्यात्मिक संतुलन जगत में बना रहता है। उक्त बातें- व्यास पीठ पंडित संजय शेखर शास्त्री महाराज ने सहजनवा ब्लाक के ग्राम पंचायत बड़हरा में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा का रसपान श्रोताओं को करा रहे थे। कथा विस्तार करते हुए उन्होंने कहा कि -भगवान शिव विश्वास हैं,तो माता पार्वती श्रद्धा व प्रेम हैं,जिसके बगैर संसार चल नहीं सकता है। उन्होंने भगवान शिव और मां पार्वती के आध्यात्मिक पक्ष के साथ-साथ सांसारिक पक्ष का विस्तृत वर्णन करते हुए कहा कि भगवान शिव ऐसे देवता हैं,जिनके शरण में जाने से जीव का निश्चित कल्याण होता है। देवताओं के विवाह में शुभता का ध्यान रखा जाता है। सभी अमंल करने वाली नकारात्मक चीजों को दूर किया जाता है। भगवान शिव के विवाह में मंगल और अमंगल सभी एक साथ मौजूद थे, परंतु भगवान के शरण में होने से सभी मंगल हुए। कथा व्यास संजय शेखर शास्त्री जी महाराज ने कहा कि- विवाह में जब सभी देवता दुल्हा बने भगवान शिव को छोड़कर चले गए, तो उनके गणों में मायूसी छा गई,बोले बाबा आप को छोड़कर सभी बाराती चले गए। इंतजार नहीं किया । भगवान शिव ने हंस कर कहा कि- अच्छा हुआ, मजा तो अपने ही ग्रुप वालों के बीच आता है। भूत-प्रेत, पिशाच, डाकिनी आदि सभी बाराती थे। मजे की बात यह थी कि- कोई चुप नहीं था। सभी नाचते व गाते हुए चल रहे थे। कथा व्यास ने कहा कि- बाबा भोलेनाथ की बारात इस तरह चल रही थी कि- जैसे कोई यमराज की सेना हो। अनेकों कौतुक के बाद भगवान शिव और मां पार्वती का विवाह संपन्न हुआ। हिमालय राज अपनी पुत्री माता पार्वती को सहृदय भगवान शिव के साथ विदा किया। उक्त अवसर पर मुख्य यजमान रमेश चन्द , श्रीमती विमला देवी, सुरेश गुप्ता, उमेश, महेश, गनेश, सत्यनारायण, राजेश, राकेश, राहुल, रुद्रांश, दिव्यांश सहित अनेक श्रोतागण मौजूद रहे।