इसौली में महिला चेहरे पर भाजपा का बड़ा दांव.. *भाजपा नेत्री मनीषा
इसौली में महिला चेहरे पर भाजपा का बड़ा दांव.. *भाजपा नेत्री मनीषा पांडेय की बढ़ती सक्रियता से गरमाई इसौली की सियासत..* *भाजपा हाई-कमान के अंदरखाने में मंथन तेज, सपा के गढ़ में महिला उम्मीदवार उतारने की रणनीति पर चर्चा..* *सुलतानपुर-* आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर इसौली विधानसभा की सियासत तेजी से करवट लेती दिखाई दे रही है। भाजपा जहां इस बार हर हाल में इसौली सीट फतह करने की रणनीति पर काम कर रही है वहीं पार्टी के अंदरखाने महिला उम्मीदवार को लेकर मंथन तेज हो गया है। राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा भाजपा नेत्री एवं यथार्थ मानस सेवा ट्रस्ट की राष्ट्रीय सचिव मनीषा पांडेय की दावेदारी को लेकर हो रही है। बीते कुछ वर्षों में मनीषा पांडेय ने जिस तरह गांव-गांव पहुंचकर जन-संपर्क, सामाजिक सरोकार और संगठनात्मक सक्रियता बढ़ाई है जिसके चलते उन्हें इसौली की राजनीति का मजबूत चेहरा बना दिया है। युवाओं और महिलाओं के बीच लगातार बढ़ते जन-समर्थन ने उनकी दावेदारी को और धार दे दी है। क्षेत्र में उनकी सक्रिय मौजूदगी ने विरोधी दलों की बेचैनी भी बढ़ा दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला आरक्षण और महिला सशक्तिकरण को बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में जुटी भाजपा इस बार इसौली में नया प्रयोग कर सकती है। ऐसे में महिला चेहरे को मैदान में उतारने की संभावनाओं ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच भी महिला उम्मीदवार को लेकर चर्चाएं तेज हैं। गौरतलब है कि वर्ष 2012 से लेकर 2022 तक के तीन बार हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा को इसौली सीट पर भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है। पार्टी के सूत्रों की मानें तो पिछली चुनावी हार के पीछे संगठनात्मक तालमेल की कमी और रणनीतिक चूक को बड़ा कारण माना गया है। यही वजह है कि इस बार भाजपा कोई जोखिम लेने के मूड में नजर नहीं आ रही है।वहीं भाजपा महिला मोर्चा काशी प्रांत की क्षेत्रीय उपाध्यक्ष बबिता अखिलेश तिवारी और पूर्व विधानसभा प्रत्याशी रहे ओम प्रकाश पांडेय बजरंगी की पुत्र बहू नूतन पांडेय का नाम भी संभावित दावेदारों में चर्चा में है। हालांकि क्षेत्र में लगातार सक्रियता और जन-संपर्क के आधार पर मनीषा पांडेय का नाम तेजी से उभरता दिखाई दे रहा है। इसौली विधान सभा के राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो यह सीट लंबे समय से बड़े राजनीतिक संघर्ष का केंद्र रही है। कांग्रेस, बसपा और सपा यहां जीत का परचम लहरा चुकी हैं लेकिन भाजपा अब तक स्थाई जीत दर्ज नहीं कर सकी है। ऐसे में आगामी चुनाव में उम्मीदवार चयन भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है।