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रिपोर्टर राहुल कुमार सिंह
Sultanpurलगभग १ घंटा पहले

*अखिल भारतीय फार्मासिस्ट एसोसिएशन ने फार्मासिस्टों की उठाई प्रमुख मांगें।* अखिल भारतीय

*अखिल भारतीय फार्मासिस्ट एसोसिएशन ने फार्मासिस्टों की उठाई प्रमुख मांगें।* अखिल भारतीय फार्मासिस्ट एसोसिएशन के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य आलोक पांडेय के कुशल दिशा-निर्देशन तथा जिला अध्यक्ष उदयभान सिंह जी के नेतृत्व में आज जिलाधिकारी महोदय को को लम्बे समय से लंबित समस्याओं के संबंध में एक विस्तृत मांग पत्र (प्रार्थना-पत्र) माननीय मुख्यमंत्री के नाम दिया गया । प्रतिनिधिमंडल की बातों को बेहद गंभीरता से सुनते हुए फार्मासिस्टों के हितों को ध्यान में रखकर समुचित आदेश पारित करने का सहृदय अनुरोध किया है।संगठन ने कहा हम इस मांग पत्र के माध्यम से देश के समस्त दवा व्यवसायियों, फार्मासिस्टों और आम जनता की ओर से एक अत्यंत संवेदनशील विषय पर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं। हाल ही में सरकार द्वारा कफ सीरप और अन्य सामान्य स्वास्थ्य सीरपों को 'शेड्यूल एच' श्रेणी में शामिल करने का प्रस्ताव सामने आया है। इस निर्णय से देश की स्वास्थ्य व्यवस्था और आम नागरिकों को होने वाली व्यावहारिक समस्याओं के संबंध में हम निम्नलिखित बिंदु आपके समक्ष रखना चाहते हैं: आम जनता पर आर्थिक और मानसिक बोझः कफ सीरप और सामान्य सीरप रोजमर्रा की स्वास्थ्य समस्याओं (जैसे सर्दी, खांसी, एलर्जी) के लिए प्राथमिक उपचार का हिस्सा हैं। इन्हें शेड्यूल एच में डालने से मरीजों को हर छोटी समस्या के लिए डॉक्टर की भारी फीस चुकानी होगी और पर्चा (Prescription) बनवाना होगा, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य संकटः हमारे देश के ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में डॉक्टरों की भारी कमी है। वहां की जनता प्राथमिक राहत के लिए स्थानीय केमिस्टों पर निर्भर रहती है। इस कड़े नियम से ग्रामीण आबादी समय पर बुनियादी उपचार पाने से वंचित हो जाएगी। दवा व्यवसायियों (Chemists) के लिए व्यावहारिक कठिनाइयाँः शेड्यूल एच की दवाओं के लिए बेहद जटिल कागजी कार्रवाई और विस्तृत रिकॉर्ड बनाए रखना अनिवार्य होता है। देश के लाखों छोटे और मध्यम केमिस्टों के लिए यह प्रक्रिया अत्यधिक समय लेने वाली है, जिससे उनका व्यापार प्रभावित होगा और इंस्पेक्टर राज या उत्पीड़न की आशंका बढेगी । दुरुपयोग रोकने का वैकल्पिक मार्गः हम नशीली दवाओं के दुरुपयोग को रोकने के सरकार के संकल्प का पूरी तरह समर्थन करते हैं। किंतु कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा किए जाने वाले दुरुपयोग के कारण पूरी कफ सीरप श्रेणी को प्रतिबंधित करना उचित नहीं है। इसके बजाय केवल नशीले सॉल्ट्स (जैसे कोडीन आधारित सीरप) पर निगरानी बढ़ाई जानी चाहिए, न कि सामान्य और सुरक्षित सीरपों पर। अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि जनहित और व्यावहारिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इस प्रस्ताव पर पुनः विचार करें। कफ सीरप और अन्य सामान्य सीरपों को शेड्यूल एच से बाहर रखा जाए ताकि आम जनता को सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं मिलती रहें। हम इस विषय पर सरकार के साथ मिलकर कोई बीच का और व्यावहारिक रास्ता निकालने के लिए सदैव चर्चा को तैयार हैं। सकारात्मक निर्णय की आशा में। इस मौके पर प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य एवं मंडल अध्यक्ष अयोध्या आलोक पांडेय जी, जिला अध्यक्ष उदयभान सिंह, जिला उपाध्यक्ष, संजय शुक्ला, जिला उपाध्यक्ष आलोक पाठक, जिला सचिव रविकांत वर्मा,तहसील अध्यक्ष कादीपुर अनुज सिंह, तहसील सचिव धीरेन्द्र मौर्य , ब्लॉक अध्यक्ष धनपतगंज ,अजय गुप्ता, ब्लॉक महासचिव मोतिगरपुर विवेक पांडेय आदि फार्मासिस्ट साथी उपस्थित रहे। सभी फार्मासिस्ट साथियों का जिला अध्यक्ष उदयभान सिंह ने आभार प्रकट किया।

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