ग्राम प्रधान पर धोखाधड़ी कर कीमती जमीन हड़पने का आरोप, पीड़ित परिवार ने प्रशासन से लगाई न्याय की गुहार

ग्राम प्रधान पर धोखाधड़ी कर कीमती जमीन हड़पने का आरोप, पीड़ित परिवार ने प्रशासन से लगाई न्याय की गुहार फतेहपुर। जनपद के थाना थरियांव क्षेत्र के ग्राम सलेमपुर में एक परिवार ने वर्तमान ग्राम प्रधान पर कथित रूप से धोखाधड़ी कर उनकी कीमती भूमि हड़पने का आरोप लगाया है। पीड़ित परिवार ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की मांग की है। पीड़ित घुरवा पुत्र बुधई निवासी ग्राम सलेमपुर के अनुसार, गाटा संख्या 678 मि., रकबा 0.2110 हेक्टेयर भूमि के सह-स्वामी वह, उसका भाई दसुवा तथा माता मैकीवा हैं। आरोप है कि गांव के वर्तमान ग्राम प्रधान सुल्तान खान इस भूमि पर कब्जा करना चाहते हैं। पीड़ित परिवार का कहना है कि 10 फरवरी 2025 को उक्त गाटा में से 0.0510 हेक्टेयर भूमि का बैनामा कथित रूप से बहला-फुसलाकर रामदीन पुत्र झुरिया, निवासी सदियापुर (ब्लॉक हथगांव) के नाम करा दिया गया। परिवार का आरोप है कि उन्हें कॉलोनी दिलाने का झांसा देकर तहसील खागा ले जाया गया और बिना पूरी जानकारी दिए दस्तावेजों पर अंगूठा लगवा लिया गया। परिवार के अनुसार, वर्ष 2026 में जब रामदीन उक्त भूमि पर नींव खोदकर बाउंड्रीवाल बनाने पहुंचे, तब उन्हें कथित बैनामे की जानकारी हुई। इसके बाद तहसील से दस्तावेजों की प्रति निकलवाने पर पूरे प्रकरण का पता चला। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि बैनामे में भूमि की चौहद्दी भी गलत दर्शाई गई है तथा पूरी प्रक्रिया कथित रूप से साजिश और सांठगांठ के तहत की गई। पीड़ितों का कहना है कि संबंधित भूमि मुख्य सड़क पर स्थित है और उसकी बाजार कीमत काफी अधिक है। उनका आरोप है कि बिना वास्तविक लेन-देन के फर्जी तरीके से दस्तावेज तैयार कर भूमि हड़पने का प्रयास किया गया। घुरवा की पत्नी सावित्री ने आरोप लगाया कि उनके पति का मानसिक संतुलन ठीक नहीं है और इसी स्थिति का लाभ उठाकर उनसे दस्तावेजों पर अंगूठा लगवा लिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ग्राम प्रधान उन्हें और उनके परिवार को गाली-गलौज करने के साथ जान से मारने की धमकी देते हैं। वहीं घुरवा के भाई दसुवा ने बताया कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है, लेकिन अब तक उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर न्याय दिलाने की मांग की है। नोट: इस समाचार में उल्लिखित सभी आरोप पीड़ित पक्ष के हैं। समाचार प्रकाशित होने तक ग्राम प्रधान अथवा दूसरे पक्ष का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है। मामले की सत्यता का अंतिम निर्धारण सक्षम प्राधिकारी की जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।