एटा ब्रेकिंग - मंत्री बेबीरानी मौर्य के 17 बार फोन करने की

एटा ब्रेकिंग - मंत्री बेबीरानी मौर्य के 17 बार फोन करने की खबर निकली भ्रामक, 2 बार ही हुआ था कॉल, छत गिरने से नहीं हो पाई बात - PRO ने किया खुलासा *एटा।* कैबिनेट मंत्री बेबीरानी मौर्य द्वारा एटा जिलाधिकारी को 17 बार फोन करने और DM द्वारा फोन न उठाने के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। इस पूरे विवाद पर मंत्री के PRO आशीष मौर्य ने स्थिति स्पष्ट की है। PRO आशीष मौर्य ने वरिष्ठ पत्रकार राकेश भदौरिया को बताया कि 17 बार फोन करने की बात पूरी तरह गलत और भ्रामक है। मंत्री के फोन से लखनऊ से 25 अगस्त को कार्यक्रम से एक दिन पहले केवल दो बार ही एटा DM के CUG नंबर पर कॉल की गई थी। उन्होंने बताया कि फोन उठा भी था और कॉल बैक भी आई थी, लेकिन बात पूरी नहीं हो पाई। "स्टाफ ने कहा कि हम सर को कॉल कनेक्ट कर रहे हैं, लेकिन सर कॉल काट रहे हैं।" PRO ने कहा, "मैंने अपना परिचय दिया कि मंत्री जी बात करना चाह रही हैं। कहा कि आप नोट कर लीजिए, जब DM साहब फ्री हों तो कॉल कर लें।" *छत गिरने से नहीं हो पाई बात* जानकारी के अनुसार उसी दौरान बारिश के चलते DM आवास की छत गिरने का हादसा हो गया था, जिसमें बच्चे घर पर थे। इस वजह से DM से पूरी बात नहीं हो पाई। बाद में जब 26 अगस्त को मंत्री एटा पहुंचीं तो DM ने उन्हें इसकी जानकारी दी। *26 अगस्त के कार्यक्रम का पूरा मामला* दरअसल 26 अगस्त को मुख्यमंत्री के लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर फ्री बस यात्रा सुविधा कार्यक्रम में मंत्री बेबीरानी मौर्य एटा आई थीं। इस दौरान उन्होंने सार्वजनिक रूप से DM अरविंद सिंह से फोन न उठाने पर नाराजगी जताई थी। PRO के अनुसार मंत्री DM को CM के निर्देशों और कार्यक्रम में एड-ऑन होने वाले बिंदुओं को लेकर तैयारी के बारे में बताना चाहती थीं। *DM ने दिखाई परिपक्वता* इस पूरे एपिसोड में DM अरविंद सिंह के गरिमामय व्यवहार की जनपद में चर्चा हो रही है। बताया जा रहा है कि जब मंत्री मंच पर नाराजगी जता रही थीं, तब मुख्यमंत्री का लाइव प्रसारण चल रहा था और मंत्री खुद कार्यक्रम में लगभग एक घंटा लेट पहुंची थीं। DM चाह सकते थे कि वह इस गलत नैरेटिव का खंडन करें या प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपना पक्ष रखें, लेकिन उन्होंने सहृदयता और परिपक्वता का परिचय देते हुए कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। जबकि शासन का GO भी कहता है कि अगर अधिकारी किसी जनप्रतिनिधि का कॉल न उठा पाए तो कॉल बैक करना चाहिए, क्योंकि विषम परिस्थितियां आ सकती हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि जिला प्रशासन के अन्य अधिकारी लगातार मंत्री के संपर्क में थे और कार्यक्रम पर चर्चा हो रही थी, ऐसे में सार्वजनिक मंच से इस तरह की नाराजगी कितनी उचित है।