आज गोरखपुर से शुरू हो रही गोविष्टि यात्रा; शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने

आज गोरखपुर से शुरू हो रही गोविष्टि यात्रा; शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कही यह बात शंकराचार्य की गविष्ठी यात्रा को लेकर गोरखपुर जिला प्रशासन ने कुल 29 बिंदुओं के जरिए कंडीशन भी लगाई है. गोरखपुर: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती दो दिवसीय दौरे पर शनिवार को गोरखपुर पहुंचे. अपने कार्यक्रम की शुरुआत उन्होंने सहजनवा विधानसभा क्षेत्र के पनिका गांव से की. यह उनके पुरखों का गांव है. यहां पहुंचकर उन्होंने सबसे पहले प्राचीन शिव मंदिर में विधि-विधान से दर्शन-पूजन किया. बाबा टेकधर की समाधि पर पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की. पनिका में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि पनिका की धरती हमारे पूर्वजों की धरती है. उन्होंने बताया कि गौ माता के संरक्षण और जागरूकता के उद्देश्य से गोरखपुर से विशेष यात्रा शुरू की जा रही है, जो लगातार 81 दिनों तक चलेगी. इसका नाम गविष्टि यात्रा है. इस गांव ने संक्षिप्त प्रवास के दौरान उन्होंने स्थानीय लोगों से भेंटकर धर्म, परंपरा और गौ सेवा के महत्व पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि गोरक्षपुर को गोरखपुर कहा जाता है. इसलिए उनका अभियान यहां से शुरू हो रहा है. उन्होंने कहा कि सरकार भी अपनी है प्रशासन भी अपना है. सब लोग इसमें सहयोग करेंगे. दर्शन-पूजन के बाद शंकराचार्य गोरखपुर शहर के लिए रवाना हो गए. जहां उनके आगे के कार्यक्रम निर्धारित हैं. उन्होंने कहा कि उनकी यात्रा को किसी भी राजनीतिक दल का कोई न तो सहयोग प्राप्त है और न ही यह यात्रा किसी की भी गलत कमाई के जरिए शुरू होने जा रही है. गौ भक्तों के सहयोग से आगे बढ़ेगी. शंकराचार्य ने कहा कि उनके गऊ रक्षा के अभियान का ही असर है कि पूरे देश में अब इस पर चर्चा हो रही है. उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के चुनाव में देखिए किस तरह से गौ रक्षा की बात बड़े राजनीतिक दलों के नेताओं ने अपने मंच से कही है. इससे सिद्ध होता है कि उनका अभियान पूरी तरह से सफल हो रहा है और लोग इसे स्वीकार कर रहे हैं. शंकराचार्य की गविष्ठी यात्रा को लेकर गोरखपुर जिला प्रशासन ने अनुमति पत्र जारी किया है. इसमें कुल 29 बिंदुओं के जरिए कंडीशन भी लगाई है. यह निर्देश है कि इस आयोजन के जरिए कोविड के नियमों का उल्लंघन नहीं किया जाएगा. ध्वनि विस्तारक यंत्र की आवाज धीमी होगी. यात्रा में किसी भी महापुरुष या सार्वजनिक स्थान के साथ कोई छेड़छाड़ या दुरूपयोग नहीं किया जाएगा. किसी भी तरह की दुर्घटना होने पर कार्यक्रम के आयोजक को जिम्मेदार माना जाएगा. उसके ऊपर 1 लाख का जुर्माना और 5 साल की सजा का भी प्रावधान होगा. इस यात्रा में सिर्फ तीन गाड़ियों के चलने की इजाजत दी गई है. कार्यक्रम में डीजे पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है. इसके अलावा घोड़े और ऊंट का भी प्रदर्शन नहीं किया जा सकेगा. कार्यक्रम में भाषण, नारेबाजी, पोस्टर बैनर आदि प्रतिबंधित किए गए हैं. शंकराचार्य ने गोरखपुर प्रशासन के इस सहयोग का स्वागत किया है.