गोरखपुर में पारा 41 डिग्री के पार: जिला प्रशासन ने जारी की

गोरखपुर में पारा 41 डिग्री के पार: जिला प्रशासन ने जारी की 'हीट वेव' एडवाइजरी, जानें क्या करें और क्या नहीं गोरखपुर। जनपद में लगातार बढ़ रही भीषण गर्मी और लू (हीट स्ट्रोक) के खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट पर है। गोरखपुर में पिछले दिनों का औसत तापमान 37.4^\circ\text{C} के सापेक्ष अब 41.0^\circ\text{C} के आसपास दर्ज किया जा रहा है, जो अत्यधिक गर्मी की स्थिति को दर्शाता है। आमजन को इस जानलेवा गर्मी से बचाने के लिए जिलाधिकारी कार्यालय (आपदा प्रबंधन प्राधिकरण) की ओर से विस्तृत गाइडलाइन और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। अपर जिलाधिकारी (वि./रा.) एवं प्रभारी अधिकारी (आपदा) जय प्रकाश द्वारा जिला सूचना अधिकारी को निर्देशित किया गया है कि जनहित में इन जीवन रक्षक जानकारियों का दैनिक समाचार पत्रों और सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित कराया जाए, ताकि किसी भी प्रकार की भ्रामक खबरों और अफवाहों पर नियंत्रण रखा जा सके। कब लगती है लू और क्या हैं इसके लक्षण? प्रशासन द्वारा जारी एडवाइजरी के अनुसार, अत्यधिक गर्मी में शरीर के जरूरी तरल पदार्थ (बॉडी फ्लूइड) सूखने लगते हैं। शरीर में पानी और नमक की कमी होने पर लू लगने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। प्रमुख लक्षण: त्वचा का गर्म, लाल और शुष्क होना तथा पसीना न आना। तेज पल्स चलना और सांस की गति में तेजी आना। व्यवहार में अचानक परिवर्तन या भ्रम की स्थिति। सिरदर्द, मितली, थकावट, कमजोरी और चक्कर आना। पेशाब न होना या उसमें अत्यधिक कमी आना। चेतावनी: डॉक्टरों के मुताबिक, जो लोग लगातार दो घंटे से अधिक समय तक 40.6^\circ\text{C} (105^\circ\text{F}) या उससे अधिक तापमान वाली गर्म हवा के संपर्क में रहते हैं, उनके मस्तिष्क को गंभीर क्षति पहुँचने की संभावना बढ़ जाती है। बचाव के लिए क्या करें? (Do's) अपडेट रहें: मौसम विभाग और प्रशासन द्वारा जारी की जाने वाली लू की चेतावनी पर निरंतर ध्यान दें। पानी पीते रहें: प्यास न लगी हो तब भी अधिक से अधिक पानी का सेवन करें। यात्रा करते समय पानी की बोतल हमेशा साथ रखें। पारंपरिक पेय पदार्थों का उपयोग: ओआरएस (ORS) घोल के साथ-साथ घर में बने पेय पदार्थ जैसे लस्सी, मट्ठा, नीबू पानी, छाछ और चावल का मांड (माड़) लें। पहनावा: हल्के रंग के, पसीना सोखने वाले ढीले सूती वस्त्र पहनें। धूप में निकलते समय चश्मे, टोपी, छाते और चप्पल का प्रयोग जरूर करें। खुले में कार्य करने पर सावधानी: यदि खुले में काम करना मजबूरी हो, तो सिर, चेहरा और हाथ-पैरों को गीले कपड़े से ढककर रखें। कार्यस्थल पर व्यवस्था: नियोक्ता अपने कार्यस्थल पर ठंडे पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करें और श्रमिकों को सीधी धूप से बचाने के पर्याप्त इंतजाम करें। गर्भवती महिला कर्मियों और बीमार कर्मचारियों पर अतिरिक्त ध्यान दिया जाए। प्राथमिक उपचार: लू से प्रभावित व्यक्ति को तुरंत छाया में लिटाकर सूती गीले कपड़े से बदन पोंछें या नहलाएं और जल्द से जल्द चिकित्सक से संपर्क करें। क्या भूलकर भी न करें? (Don'ts) दोपहर में निकलने से बचें: दोपहर 12:00 बजे से 03:00 बजे के मध्य सीधे सूर्य की रोशनी में जाने से बचें। इस दौरान घरों की निचली मंजिलों पर रहने का प्रयास करें। वाहनों में लापरवाही नहीं: बच्चों और पालतू जानवरों को कभी भी बंद या खड़ी गाड़ियों में अकेला न छोड़ें। वस्त्रों का चयन: गहरे रंग के, भारी और तंग कपड़े पहनने से पूरी तरह परहेज करें। खान-पान पर नियंत्रण: अत्यधिक प्रोटीन वाले, बासी और संक्रमित खाद्य पदार्थों का सेवन न करें। शराब, चाय, कॉफी जैसे कैफीन युक्त पेय पदार्थों से दूरी बनाएं, क्योंकि ये शरीर को डिहाइड्रेट करते हैं। नोट: प्रशासन ने आकाशवाणी, एफएम रेडियो और डिजिटल माध्यमों को भी आरजे (RJ) के माध्यम से समय-समय पर जागरूकता संदेश प्रसारित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित रखा जा सके।