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Rajkumar Raj
Gorakhpur२३ दिन पहले

नए UGC कानून के विरोध में गोरखपुर में उबाल विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता

नए UGC कानून के विरोध में गोरखपुर में उबाल विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता

नए UGC कानून के विरोध में गोरखपुर में उबाल विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर हमला बताकर टाउनहॉल पर जोरदार प्रदर्शन गोरखपुर। केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित नए UGC कानून के विरोध में बुधवार को गोरखपुर में व्यापक विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। टाउनहॉल चौक स्थित गांधी प्रतिमा के पास विभिन्न संगठनों से जुड़े लोग एकत्र हुए और कानून को वापस लेने की मांग को लेकर जोरदार नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों के हाथों में “UGC के काले कानून को वापस लो”, “विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर हमला बंद करो” जैसे बैनर और तख्तियां थीं। अधिवक्ता, समाजसेवी, मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव, व्यापारी, आम नागरिक, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के छात्र तथा छोटे राजनीतिक दलों के नेता बड़ी संख्या में शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान “UGC कानून वापस लो”, “छात्र विरोधी कानून नहीं चलेगा” जैसे नारों से पूरा टाउनहॉल चौक गूंज उठा। धरने पर बैठे लोगों ने आरोप लगाया कि नया UGC कानून छात्र हितों के खिलाफ है और इससे देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था कमजोर होगी। इंजी. सुरेश श्रीवास्तव, राष्ट्रीय अध्यक्ष, कायस्थ सेना ने कहा कि यदि सरकार ने यह कानून वापस नहीं लिया तो देश में बड़ा आंदोलन खड़ा होगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता खत्म कर उन्हें सीधे सरकारी नियंत्रण में लाने की कोशिश की जा रही है। एडवोकेट रविन्द्र कुमार और राजेश नारायण दूबे ने आरोप लगाया कि सरकार समाज के एक वर्ग के समर्थन से सत्ता में आती है और बाद में उन्हीं के हितों के खिलाफ फैसले लेती है। उन्होंने चेतावनी दी कि आंदोलन आने वाले दिनों में और तेज होगा। मेडिकल मैनेजर अभिषेक श्रीवास्तव ने प्रधानमंत्री से अपील करते हुए कहा कि सरकार इस आंदोलन का संज्ञान ले और छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न करे, अन्यथा आंदोलन उग्र रूप ले सकता है। छात्रों ने आशंका जताई कि नया कानून शिक्षा के निजीकरण को बढ़ावा देगा और इससे फीस में भारी वृद्धि होगी। इससे गरीब, मध्यमवर्ग और ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा और भी कठिन हो जाएगी। छात्रों का कहना था कि सरकार विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक और अकादमिक निर्णयों में हस्तक्षेप करना चाहती है, जिससे पाठ्यक्रम, शोध और नियुक्तियों में राजनीतिक दबाव बढ़ेगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे शिक्षा और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।

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