महाविद्यालय भुड़कुड़ा में दिवंगत प्रो. सत्यप्रकाश को दी गई श्रद्धांजलि शोकसभा में

महाविद्यालय भुड़कुड़ा में दिवंगत प्रो. सत्यप्रकाश को दी गई श्रद्धांजलि शोकसभा में सहकर्मियों और छात्र-छात्राओं ने साझा किए संस्मरण, दो मिनट का मौन रखकर दी श्रद्धांजलि जखनियां, गाजीपुर। महाविद्यालय भुड़कुड़ा में सोमवार को कार्यवाहक प्राचार्य प्रो. रमेश कुमार के नेतृत्व में शोकसभा का आयोजन किया गया। विगत 26 अगस्त की रात कार्यवाहक प्राचार्य प्रो. सत्यप्रकाश के निधन से महाविद्यालय परिवार में शोक की लहर है। शोकसभा में महाविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं एकत्रित हुए और दिवंगत प्रो. सत्यप्रकाश के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।इस अवसर पर वक्ताओं ने प्रो. सत्यप्रकाश के साथ बिताए कार्यकाल और उनसे जुड़े संस्मरण साझा किए। विद्यार्थी जीवन से लेकर सेवाकाल तक 41 वर्षों की सहयात्रा को याद करते हुए प्रो. शिवानन्द पाण्डेय भावुक हो उठे।कार्यवाहक प्राचार्य प्रो. रमेश कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालय में संकायाध्यक्ष के रूप में कार्य करने का गौरव महाविद्यालय की दो विभूतियों को प्राप्त हुआ। इनमें संस्थापक प्राचार्य डॉ. इंद्रदेव, जो कला संकाय के संकायाध्यक्ष रहे, के बाद स्मृतिशेष प्रो. सत्यप्रकाश का नाम शामिल है, जिन्होंने वाणिज्य संकायाध्यक्ष के रूप में महाविद्यालय का गौरव बढ़ाया।डॉ. रामानंद चौबे ने प्रो. सत्यप्रकाश की सहजता और उनके तपस्वी जीवन पर प्रकाश डाला। डॉ. धर्मेन्द्र मौर्य ने कहा कि प्रो. सत्यप्रकाश प्रकृति प्रेमी थे और सेवानिवृत्ति के बाद के जीवन की कार्ययोजना भी उन्होंने बना रखी थी, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. प्रकाशचन्द पटेल ने कहा कि विचारों के स्तर पर भले ही दोनों अलग-अलग रहे हों, लेकिन प्रो. सत्यप्रकाश के व्यक्तित्व में ऐसी आत्मीयता थी, जिसने उन्हें हमेशा घनिष्ठ रूप से जोड़े रखा। उन्होंने कहा कि उनसे जुड़े अनेक संस्मरण हैं, लेकिन इस समय मन बेहद व्यथित है।शोकसभा में डॉ. सुभाष सिंह, डॉ. विजयबहादुर यादव एवं डॉ. संतोष कुमार मिश्र ने भी अपने भाव व्यक्त करते हुए दिवंगत प्रो. सत्यप्रकाश को श्रद्धांजलि अर्पित की। छात्र-छात्राओं ने भी रुंधे गले से उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर अपनी श्रद्धा व्यक्त की। अंत में महाविद्यालय परिवार ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति एवं शोकाकुल परिजनों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।