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Tapan Kumar Bose
Lucknowलगभग १ घंटा पहले

अमेठी में बदले सियासी समीकरण: तीन बार के सपा विधायक राकेश प्रताप

अमेठी में बदले सियासी समीकरण: तीन बार के सपा विधायक राकेश प्रताप

अमेठी में बदले सियासी समीकरण: तीन बार के सपा विधायक राकेश प्रताप ने थामा भाजपा का हाथ, अभय सिंह और विनोद चतुर्वेदी भी हुए भाजपाई अमेठी, 14 अक्टूबर 2026। अमेठी की राजनीति में बुधवार को बड़ा उलटफेर हुआ। गौरीगंज से लगातार तीन बार समाजवादी पार्टी के विधायक रहे राकेश प्रताप सिंह ने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। उनके साथ अयोध्या की गोसाईंगंज सीट से विधायक अभय सिंह और जालौन की कालपी सीट से विधायक विनोद चतुर्वेदी ने भी भाजपा का दामन थाम लिया। गौरीगंज के जामो रोड स्थित राकेश प्रताप सिंह के आवास 'मंगलम' पर आयोजित सदस्यता ग्रहण कार्यक्रम में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और पार्टी की राष्ट्रीय महामंत्री स्मृति ईरानी ने तीनों विधायकों को भगवा पटका पहनाकर पार्टी में शामिल कराया। तीनों ने भाजपा के टोल फ्री नंबर पर फोन कर औपचारिक सदस्यता भी ली। कार्यक्रम में प्रदेश सरकार के कई मंत्री, विधायक और पार्टी पदाधिकारी मौजूद रहे। आवास के सामने बने विशाल पंडाल में करीब पांच हजार कुर्सियां लगाई गई थीं और बड़ी संख्या में समर्थक व कार्यकर्ता जुटे थे। *राज्यसभा चुनाव के बाद बढ़ी थी सपा से दूरी* राकेश प्रताप सिंह 2012 में पहली बार गौरीगंज से सपा के टिकट पर विधायक चुने गए थे। इसके बाद 2017 और 2022 में भी उन्होंने जीत दर्ज कर हैट्रिक बनाई थी। 2024 के राज्यसभा चुनाव में उन्होंने सपा लाइन से अलग हटकर भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान किया था, जिसके बाद जून 2025 में सपा ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया था। अब उन्होंने औपचारिक रूप से भाजपा ज्वाइन कर ली है। 700 ग्राम प्रधानों को लाने का दावा कार्यक्रम से पहले राकेश प्रताप सिंह ने दावा किया था कि गौरीगंज विधानसभा क्षेत्र के करीब 700 ग्राम प्रधान, पूर्व प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य, पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य भी उनके साथ भाजपा में शामिल होंगे। अब सबकी नजर इस दावे पर टिकी है कि उनके साथ कितने जनप्रतिनिधि भाजपा से जुड़ते हैं। गौरीगंज में बदलेंगे सियासी समीकरण राकेश प्रताप सिंह के भाजपा में आने से गौरीगंज विधानसभा क्षेत्र में पार्टी की रणनीति और स्थानीय नेतृत्व के समीकरणों पर बड़ा असर पड़ सकता है। आगामी विधानसभा चुनाव में उनका व्यक्तिगत जनाधार अहम भूमिका निभा सकता है, वहीं सपा के सामने अपने पुराने समर्थकों को जोड़े रखने की चुनौती होगी। भाजपा के लिए भी नए और पुराने कार्यकर्ताओं में तालमेल बिठाना महत्वपूर्ण होगा।

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