पांच महीने से न्याय की चौखट पर डटे अधिवक्ता, सहजनवा में ग्राम
पांच महीने से न्याय की चौखट पर डटे अधिवक्ता, सहजनवा में ग्राम न्यायालय की मांग ने पकड़ा जोर! पहले और तीसरे शनिवार को शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन जारी, गरीबों-किसानों को जिला मुख्यालय की दौड़ से मुक्ति दिलाने की उठी मांग सहजनवा, गोरखपुर। तहसील सहजनवा में ग्राम न्यायालय की स्थापना की मांग को लेकर अधिवक्ताओं का आंदोलन लगातार पांच महीने से जारी है। क्षेत्र की जनता को सस्ता, सुलभ और त्वरित न्याय दिलाने के उद्देश्य से अधिवक्तागण लंबे समय से अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। प्रशासन और सरकार का ध्यान इस गंभीर जनहित के मुद्दे की ओर आकर्षित करने के लिए अधिवक्ता प्रत्येक माह के प्रथम एवं तृतीय शनिवार को सम्पूर्ण समाधान दिवस के दौरान शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। अधिवक्ताओं का कहना है कि पांच महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद उनकी मांग पर अभी तक कोई ठोस और सकारात्मक पहल सामने नहीं आई है। इससे अधिवक्ताओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि ग्राम न्यायालय की स्थापना केवल अधिवक्ताओं की मांग नहीं, बल्कि सहजनवा तहसील क्षेत्र के हजारों वादकारियों और आम जनता की आवश्यकता है। छोटे मामलों के लिए भी जिला मुख्यालय की दौड़ सहजनवा तहसील क्षेत्र में ग्राम न्यायालय नहीं होने के कारण स्थानीय गरीब, किसान, मजदूर और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को छोटे-छोटे मामलों के लिए भी गोरखपुर जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ती है। इससे वादकारियों का समय और पैसा दोनों खर्च होता है। कई बार आर्थिक परेशानी के कारण लोग अपने मामलों की पैरवी तक ठीक से नहीं कर पाते। अधिवक्ताओं का तर्क है कि यदि सहजनवा में ग्राम न्यायालय की स्थापना होती है तो स्थानीय स्तर पर ही छोटे मामलों का त्वरित निस्तारण संभव होगा। इससे वादकारियों को राहत मिलेगी और न्याय व्यवस्था भी अधिक सुलभ बनेगी। ‘न्याय सबके द्वार’ के संकल्प को मिलेगी मजबूती अधिवक्ताओं ने सरकार से मांग की है कि जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सहजनवा तहसील में अविलंब ग्राम न्यायालय की स्थापना की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं। उनका कहना है कि स्थानीय स्तर पर न्याय की व्यवस्था मजबूत होने से सरकार के ‘न्याय सबके द्वार’ जैसे संकल्प को भी धरातल पर मजबूती मिलेगी। इसी मांग को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार, लखनऊ को उपजिलाधिकारी सहजनवा के माध्यम से ज्ञापन भेजा गया है। ज्ञापन में पिछले पांच महीने से शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे अधिवक्ताओं की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए गतिरोध समाप्त कराने की अपील की गई है। आंदोलन के बीच अब फैसले का इंतजार लगातार पांच महीने से चल रहे इस आंदोलन के बीच अब अधिवक्ताओं और क्षेत्रीय जनता की निगाहें शासन-प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। अधिवक्ताओं का कहना है कि उनका आंदोलन किसी व्यक्तिगत हित के लिए नहीं, बल्कि क्षेत्र के वादकारियों को न्याय उनके नजदीक उपलब्ध कराने के लिए है। मांग करने वाले में से अनिल त्रिपाठी एडवोकेट, भूपेंद्र कुमार त्रिपाठी एड,सुनील शुक्ला एड,आकाश कुमार सिंह एड,विजय नारायण त्रिपाठी एड, उमेश चंद्र त्रिपाठी एड,सतीश चंद्र एड,अरविंद कुमार एड, जाहिद हुसैन अंसारीएड, आदि तमाम अधिवक्तागण ने माँग किया है।