उपनगर गोला में यूजीसी बिल का विरोध प्रबुद्धजनों ने रखे अपने विचार
मदरिया । उपनगर गोला बाजार में यूजीसी के नए प्रावधानों को लेकर सवर्ण समाज में भारी रोष व्याप्त है। इस कानून के विरोध में मंगलवार और बुधवार को कस्बे एवं आसपास के क्षेत्रों से आए सवर्ण समाज के लोगों ने नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन किया तथा सरकार से बिल को वापस लेने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह कानून न केवल सवर्ण युवाओं के भविष्य को प्रभावित करेगा, बल्कि समाज में जातिगत भेदभाव को भी बढ़ावा देगा। उनका आरोप है कि इस कानून में केवल एक पक्ष को ध्यान में रखा गया है, जो समतामूलक समाज की अवधारणा के विपरीत है। प्रदर्शनकारियों ने इसे ब्रिटिश साम्राज्यकाल की मानसिकता से प्रेरित बताते हुए कहा कि पहले ही फैसला सुरक्षित रखकर कार्यवाही करना लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है। ऐसे प्रावधानों से सवर्ण युवाओं की शिक्षा और भविष्य पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इस अवसर पर वी.एस.ए.वी. पीजी कॉलेज के प्रबंधक एवं प्रख्यात चिकित्सक डॉ. अनिल तिवारी ने कहा कि यूजीसी बिल पर उनकी सोच राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की कविता में निहित है। उन्होंने कहा कि यह बिल देश में आपसी भाईचारे को खंडित करने वाला है और देशहित में नहीं है। डॉ. तिवारी ने दिनकर की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा— “अन्याय न तो भीष्म ने किया था, न द्रोण ने, पर उन्हें भी चुप्पी और साहचर्य का दंड मिला। समर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल ब्याध, जो तटस्थ है, समय लिखेगा उसके भी अपराध।” वहीं वरिष्ठ भाजपा नेता रतन प्रकाश दुबे ने भी यूजीसी बिल पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि सरकार बिना किसी जन-मांग के यह बिल लेकर आई है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि यह बिल लागू हुआ और कोई छात्र किसी सवर्ण छात्र पर झूठा आरोप लगा देता है, तो उसके जीवन और भविष्य पर गंभीर असर पड़ेगा। ऐसे में सवर्ण समाज इस नियम को स्वीकार नहीं करेगा और सरकार को इसे जनहित में वापस लेना होगा।