एक दिन की एसपी नार्थ बनीं धृति तिवारी और नैन्सी तिवारी, फरियादियों

एक दिन की एसपी नार्थ बनीं धृति तिवारी और नैन्सी तिवारी, फरियादियों की समस्याएं सुन अधिकारियों को दिए निर्देश महिला सशक्तीकरण की अनूठी पहल, छात्राओं ने संभाली पुलिसिंग की कमान एसएसपी डॉ. कौस्तुभ ने समझाए पुलिस अधिकारियों के दायित्व और कार्यप्रणाली एसपी नार्थ राजेश गुनावत ने छात्राओं को सौंपे अधिकार, एसएसपी ने किया सम्मानित गोरखपुर।महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देने और छात्राओं में नेतृत्व क्षमता विकसित करने के उद्देश्य से गोरखपुर पुलिस ने एक अनूठी पहल की। पुलिस कार्यालय में एसपी नार्थ के कार्यालय की जिम्मेदारी एक दिन के लिए कक्षा 12 की छात्राओं धृति तिवारी और नैन्सी तिवारी को सौंपी गई। दोनों छात्राओं ने न केवल एसपी नार्थ के दायित्वों को समझा, बल्कि फरियादियों की समस्याएं सुनकर उनके त्वरित निराकरण के लिए संबंधित क्षेत्राधिकारी और थाना प्रभारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। पुलिस अधिकारियों की भूमिका में दोनों छात्राओं का आत्मविश्वास और समस्याओं के समाधान के प्रति गंभीरता देखते ही बनी। एक दिन की एसपी नार्थ बनीं धृति तिवारी और नैन्सी तिवारी ने पुलिस कार्यालय पहुंचने वाले फरियादियों की शिकायतें सुनीं। उन्होंने शिकायतों की प्रकृति को समझते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने और पीड़ितों की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस दौरान दोनों छात्राओं को यह समझने का अवसर मिला कि पुलिस अधिकारी किस तरह पीड़ितों की बात सुनते हैं, शिकायतों की गंभीरता का आकलन करते हैं और निष्पक्ष तरीके से कार्रवाई की दिशा तय करते हैं। एक दिन की एसपी नार्थ धृति तिवारी ने कहा कि किसी भी पीड़ित को कोई समस्या हो तो उसे अपनी शिकायत तत्काल पुलिस तक पहुंचानी चाहिए, ताकि समय रहते उसकी समस्या का समाधान किया जा सके। उन्होंने फरियादियों की समस्याओं को सुनते हुए उनके निराकरण के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए। धृति ने अपने हिस्से आए दायित्वों का बेबाकी और आत्मविश्वास के साथ निर्वहन किया। पुलिसिंग की जिम्मेदारी संभालते हुए उन्होंने यह समझने का प्रयास किया कि किसी पीड़ित को राहत दिलाने के लिए संवेदनशीलता, धैर्य और सही निर्णय लेना कितना जरूरी है। एसपी नार्थ राजेश गुनावत ने इस पहल को महिला सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि छात्राओं को नेतृत्व का अवसर देने के उद्देश्य से धृति तिवारी और नैन्सी तिवारी को एक दिन के लिए एसपी नार्थ की जिम्मेदारी सौंपी गई। उन्हें कार्य करने के लिए आवश्यक अधिकार दिए गए, ताकि वे पुलिस अधिकारियों के दायित्वों को करीब से समझ सकें और यह अनुभव कर सकें कि पुलिस व्यवस्था किस तरह काम करती है। दोनों छात्राओं ने अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए फरियादियों की समस्याएं सुनीं और संबंधित क्षेत्राधिकारियों तथा थाना प्रभारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि पुलिसिंग केवल आदेश देने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पीड़ित की बात ध्यान से सुनना, मामले की गंभीरता को समझना, तथ्यों के आधार पर निर्णय लेना और नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करना भी शामिल है। इस तरह की पहल से छात्राओं को प्रशासनिक व्यवस्था की वास्तविक कार्यप्रणाली समझने का अवसर मिलता है। साथ ही उनमें आत्मविश्वास, निर्णय लेने की क्षमता और समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित होता है। इस दौरान दोनों छात्राओं ने एसएसपी कार्यालय में भी पहुंचकर पुलिस की कार्यप्रणाली को नजदीक से देखा। उन्होंने समझा कि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के समक्ष अपनी शिकायत लेकर आने वाले फरियादियों की समस्याओं को किस तरह सुना जाता है और उनके समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों को किस प्रकार निर्देशित किया जाता है। फरियादियों से संवाद करने से लेकर शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया तक, दोनों छात्राओं को पुलिस प्रशासन के विभिन्न पहलुओं को समझने का अवसर मिला। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. कौस्तुभ ने दोनों छात्राओं को पुलिस अधिकारियों के दायित्वों, शिकायतों की सुनवाई, निर्णय लेने की प्रक्रिया और समस्याओं के निराकरण के तरीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पुलिस अधिकारी के लिए जरूरी है कि वह प्रत्येक फरियादी की बात गंभीरता से सुने, शिकायत के तथ्यों को समझे और कानून के अनुरूप उचित कार्रवाई सुनिश्चित करे। पीड़ितों के साथ संवेदनशील व्यवहार करना और उन्हें न्याय दिलाने के लिए प्रभावी कदम उठाना पुलिस की जिम्मेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। एसएसपी ने छात्राओं को यह भी समझाया कि पुलिसिंग में कई बार ऐसे मामले सामने आते हैं, जिनमें तत्काल निर्णय लेने के साथ-साथ सावधानी बरतना भी आवश्यक होता है। शिकायतों के निस्तारण में निष्पक्षता, संवेदनशीलता और जवाबदेही का विशेष महत्व है। दोनों छात्राओं ने अधिकारियों से इन पहलुओं की जानकारी प्राप्त की और पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारियों को करीब से जाना। एक दिन के लिए एसपी नार्थ की जिम्मेदारी निभाने वाली धृति तिवारी पिपराइच क्षेत्र की निवासी हैं। उनके पिता इंजीनियर हैं, जबकि उनकी माता गृहिणी हैं। वहीं नैन्सी तिवारी पादरी बाजार क्षेत्र की निवासी हैं। उनके पिता पुलिस विभाग में सेवारत हैं और उनकी माता गृहिणी हैं। दोनों छात्राएं एकेडमी ग्लोबल, जंगल धूषण में कक्षा 12 में अध्ययनरत हैं। इस पहल के माध्यम से छात्राओं को केवल पुलिस कार्यालय की कार्यप्रणाली देखने का अवसर ही नहीं मिला, बल्कि उन्हें जिम्मेदारी संभालने, लोगों की समस्याएं सुनने और समाधान के लिए निर्णय लेने का व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त हुआ। महिला सशक्तीकरण का संदेश देती इस पहल ने यह भी रेखांकित किया कि उचित अवसर और विश्वास मिलने पर छात्राएं नेतृत्व की भूमिका को प्रभावी ढंग से निभा सकती हैं। एसएसपी डॉ. कौस्तुभ और एसपी नार्थ राजेश धुनावत ने एक दिन के लिए एसपी नार्थ बनीं धृति तिवारी और नैन्सी तिवारी को सम्मानित किया। पुलिस अधिकारियों ने इस पहल के जरिए छात्राओं को भविष्य में नेतृत्व की जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित किया। दोनों छात्राओं का यह अनुभव उनके लिए यादगार रहा और उन्हें पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारियों, जनसुनवाई तथा पीड़ितों की समस्याओं के समाधान की प्रक्रिया को करीब से समझने का अवसर मिला।