घर सुल्तानपुर फाउंडेशन की 'नो डीजे वाइब्रेशन' मुहिम को मिला व्यापक समर्थन
घर सुल्तानपुर फाउंडेशन की 'नो डीजे वाइब्रेशन' मुहिम को मिला व्यापक समर्थन सुल्तानपुर धार्मिक महोत्सवों, तीज-त्योहारों और वैवाहिक समारोहों में हाई वाइब्रेशन डीजे, तेज ध्वनि और तीक्ष्ण रोशनी के खिलाफ घर सुल्तानपुर फाउंडेशन की *'No DJ Vibrations'* मुहिम को जिले में व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है। *सामाजिक और बुद्धिजीवी वर्ग ने की अपील* ----------- /सुल्तानपुर/ मुहिम के समर्थन में राजनीतिक, सामाजिक, चिकित्सकीय, शैक्षणिक और बुद्धिजीवी वर्ग ने सोशल मीडिया पर आयोजकों और डीजे संचालकों से अपील की है कि उत्सवों का उल्लास बना रहे, लेकिन ध्वनि और वाइब्रेशन से किसी के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। *गणमान्य लोगों ने दिया समर्थन* --------- /सुल्तानपुर/ इस मुहिम से भाजपा जिला अध्यक्ष सुशील त्रिपाठी, संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी एवं प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. ए.के. सिंह, सराफा व्यापार मंडल अध्यक्ष देवी प्रसाद सोनी, एडवोकेट डी.पी. गुप्ता, प्रो. रंजना सिंह (KNIT), डॉ. सुधाकर सिंह, डॉ. राधेश्याम सिंह (पूर्व प्राचार्य, केएनआई), बॉलीवुड लेखक रितेश रजवाड़ा, सरदार बलदेव सिंह, राहुल सेठ, डॉ. मकसूद सरदार, धर्मेश मिश्रा, स्वामी अजयानंद, पं. चंद्रकांत मिश्रा समेत सैकड़ों लोगों ने समर्थन दिया है। *डीजे के शोर को रोकने पर जोर* -------- /सुल्तानपुर/ फाउंडेशन का कहना है कि आयोजन पूरे उत्साह और भक्ति के साथ मनाए जाएं, लेकिन हाई बेस, तेज वाइब्रेशन और तीक्ष्ण रोशनी से बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को परेशानी न हो। बीते वर्षों में कुछ दुखद घटनाओं के बाद परिवारों ने भी इस पर चिंता जताई है। *डिजिटल ओपिनियन पोल में 85% से अधिक समर्थन* --------- /सुल्तानपुर/ मुहिम के तहत हुए डिजिटल ओपिनियन पोल में 85 प्रतिशत से अधिक नागरिकों ने डीजे के हाई बीट और वाइब्रेशन को नियंत्रित करने का समर्थन किया है। फाउंडेशन ने स्पष्ट किया है कि यह किसी धर्म या त्योहार के खिलाफ नहीं, बल्कि उत्सवों को सुरक्षित और स्वास्थ्य अनुकूल बनाने की अपील है। *प्रशासन से नियमों के पालन की मांग* ---------- /सुल्तानपुर/ आयोजनों में निर्धारित ध्वनि मानकों के पालन, विशेषकर घनी आबादी, अस्पतालों और संवेदनशील क्षेत्रों के आसपास ध्वनि नियंत्रित रखने की मांग उठ रही है। *अधिवक्ताओं ने भी उठाई आवाज* ----------- /सुल्तानपुर/ सामाजिक संस्थाओं से जुड़े अधिवक्ताओं ने प्रशासन से उच्च न्यायालय और ध्वनि नियंत्रण नियमों का पालन सुनिश्चित कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि प्रभावी नियंत्रण नहीं हुआ तो गंभीर मरीजों और बच्चों के हित में कानूनी विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।