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Anup Singh Rudrapur
Deoria१३ मिनट पहले

अमेरिकी हमले में मारे गए देवरिया के शिवानंद का शव गांव पहुंचा,

अमेरिकी हमले में मारे गए देवरिया के शिवानंद का शव गांव पहुंचा,

अमेरिकी हमले में मारे गए देवरिया के शिवानंद का शव गांव पहुंचा, परिजनों ने मुआवजे और नौकरी की मांग की देवरिया। अमेरिकी हमले में जान गंवाने वाले देवरिया जिले के सुरौली गांव निवासी शिवानंद चौरसिया (38) का शव बुधवार शाम उनके पैतृक गांव पहुंचा। शव के गांव पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया। पत्नी और बहन बेहोश हो गईं, जबकि माता-पिता और भाई का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों ने शव को एम्बुलेंस से उतारने से पहले अपनी मांगें रखीं और मुख्यमंत्री से वार्ता की मांग की। परिवार की प्रमुख मांगों में एक करोड़ रुपये का मुआवजा तथा पत्नी को सरकारी नौकरी शामिल है। इस बीच, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने फोन पर शिवानंद की पत्नी और भाई राम प्रवेश से बात कर संवेदना व्यक्त की। उन्होंने परिवार को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को सरकार तक पहुंचाया जाएगा और आर्थिक सहायता के लिए भी प्रयास किए जाएंगे। मृतक के घर पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं का पहुंचना जारी है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के नेताओं के साथ-साथ भाजपा के रामपुर कारखाना विधायक सुरेंद्र चौरसिया भी परिजनों से मिलने पहुंचे। रोजगार की तलाश में 2012 में छोड़ा था गांव शिवानंद के पिता रामजी चौरसिया के अनुसार, शिवानंद ने महंगावा स्थित गंगा प्रसाद इंटर कॉलेज से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की शिक्षा प्राप्त की थी। पढ़ाई पूरी करने के बाद वर्ष 2012 में रोजगार की तलाश में घर छोड़ दिया। उन्होंने दुबई, मुंबई, लखनऊ, पुणे और सोलापुर सहित कई शहरों में काम किया। बाद में उन्होंने मर्चेंट नेवी का कोर्स किया और समुद्री जहाजों पर नौकरी के लिए आवश्यक सीडीसी (Continuous Discharge Certificate) भी हासिल किया। इसके लिए परिवार ने गांव और रिश्तेदारों से उधार लेकर करीब छह लाख रुपये खर्च किए थे। परिजनों के अनुसार, सितंबर 2025 में शिवानंद मुंबई से सिंगापुर पहुंचे और एक शिपिंग कंपनी के जहाज पर काम शुरू किया था। उनकी यह पहली समुद्री नियुक्ति थी। परिवार को उम्मीद थी कि नौकरी मिलने के बाद आर्थिक स्थिति सुधरेगी, लेकिन इससे पहले ही यह दुखद घटना हो गई। शिवानंद की मौत से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है और गांव में बड़ी संख्या में लोग परिवार को सांत्वना देने पहुंच रहे हैं।

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