पितृ पक्ष में तर्पण और श्राद्ध का विशेष महत्व

महादेवा-ढेबरा। पितृ पक्ष को अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता प्रकट करने का महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है। इस दौरान पितरों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य करने की परंपरा है। महादेवा-ढेबरा कास्त त्रिफला निवासी ज्योतिषाचार्य पंडित राममिलन पाण्डेय ने पितृ पक्ष में तर्पण एवं श्राद्ध की विधि की जानकारी दी। आचार्य राममिलन पाण्डेय ने बताया कि तर्पण से पूर्व स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए। इसके बाद पितरों का स्मरण करते हुए स्वच्छ जल में काला तिल और कुश का प्रयोग कर विधिपूर्वक तर्पण करना चाहिए। तर्पण के दौरान पितरों के नाम और गोत्र का स्मरण करते हुए श्रद्धापूर्वक जल अर्पित किया जाता है। उन्होंने बताया कि पितरों की मृत्यु तिथि ज्ञात हो तो पितृ पक्ष में उसी तिथि को श्राद्ध करना चाहिए। श्राद्ध कर्म में पितरों के निमित्त भोजन अर्पित करने, ब्राह्मणों को भोजन कराने तथा सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य करने की परंपरा है। उन्होंने कहा कि पितृ कर्म में आडंबर से अधिक श्रद्धा, नियम और विधि का महत्व है। पितृ पक्ष में पूर्वजों का स्मरण कर उनके प्रति सम्मान प्रकट करना हमारी धार्मिक एवं पारंपरिक संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।