*भव्य कलश यात्रा के साथ शतचंडी महायज्ञ का शुभारंभ, भक्ति और आस्था

*भव्य कलश यात्रा के साथ शतचंडी महायज्ञ का शुभारंभ, भक्ति और आस्था में डूबा सोहगौरा* गोरखपुर के कौड़ीराम क्षेत्र अंतर्गत सोहगौरा गांव में अजय राम त्रिपाठी के सौजन्य से 3 मई से 7 मई तक आयोजित शतचंडी महायज्ञ का शुभारंभ अत्यंत भव्य और श्रद्धामय वातावरण में कलश यात्रा के साथ हुआ। इस आयोजन ने पूरे गांव को धार्मिक रंग में रंग दिया, जहां हर ओर भक्ति, उत्साह और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। कलश यात्रा सोहगौरा गांव से विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ प्रारंभ हुई। सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु, महिलाएं, युवक और बच्चे सिर पर कलश धारण कर जय माता दी के जयकारों के साथ बड़हलगंज मुक्तिपथ स्थित मां सरयू के पावन तट तक पहुंचे। वहां वैदिक मंत्रों के बीच विधिपूर्वक जल भरकर कलश स्थापित किए गए। इसके पश्चात यह विशाल शोभायात्रा पुनः सोहगौरा गांव लौटी, जहां पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं द्वारा स्वागत किया गया और यात्रा का समापन हुआ। यह आयोजन स्वर्गीय भगवती राम त्रिपाठी के पौत्र एवं स्वर्गीय वीरेंद्र राम के सुपुत्र श्री अजय कुमार त्रिपाठी (सोहगौरा) द्वारा लगातार दूसरे वर्ष कराया जा रहा है। उनके इस धार्मिक प्रयास की क्षेत्र में सराहना की जा रही है। महायज्ञ के दौरान दुर्गा सप्तशती पाठ एवं कथा का आयोजन किया जा रहा है, जिसका वाचन आचार्य योगेश जी महाराज (विंध्याचल, गायत्री मंदिर) के मुखारविंद से होगा। उनके प्रवचनों से श्रद्धालुओं को धर्म, आस्था और संस्कारों की गहराई से अवगत होने का अवसर मिलेगा। महायज्ञ स्थल पर भव्य पंडाल, आकर्षक सजावट, हवन कुंड और श्रद्धालुओं के लिए समुचित व्यवस्था की गई है। प्रतिदिन हवन-पूजन, भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण का आयोजन भी किया जाएगा। पूरे कार्यक्रम के दौरान गांव में मेले जैसा वातावरण बना हुआ है। इस पावन अवसर पर अजय राम त्रिपाठी, शाश्वत त्रिपाठी, शार्दुल त्रिपाठी, सात्विक त्रिपाठी, शक्तिधर शुक्ला सहित क्षेत्र के सैकड़ों श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और आयोजन को सफल बनाने में अपना योगदान दिया। आयोजन समिति द्वारा सुरक्षा और व्यवस्था के भी उचित इंतजाम किए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह के धार्मिक आयोजन न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करते हैं, बल्कि समाज में एकता, भाईचारा और सकारात्मकता का संदेश भी फैलाते हैं। शतचंडी महायज्ञ के माध्यम से पूरे क्षेत्र में सुख-शांति और समृद्धि की कामना की जा रही है।