सड़क बनी तालाब, गड्ढों में दफन विकास! बरईपार में ग्रामीणों का नेताओं
सड़क बनी तालाब, गड्ढों में दफन विकास! बरईपार में ग्रामीणों का नेताओं के खिलाफ प्रदर्शन, बोले—सड़क-नाली नहीं सुधरी तो वोट भी नहीं, गांव में नेताओं की एंट्री भी बंद गोरखपुर/सहजनवां। पाली ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम पंचायत बरईपार में बदहाल सड़क और जलभराव की समस्या को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश अब खुलकर सामने आ गया है। बखिरा-सहजनवां मुख्य मार्ग से पाली ब्लॉक स्थित बीआरसी तक जाने वाली सर्विस रोड की हालत इस कदर खराब हो चुकी है कि बारिश के दिनों में सड़क और तालाब के बीच फर्क करना मुश्किल हो जाता है। जगह-जगह बने गहरे गड्ढों में पानी भरने से राहगीरों, स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और दोपहिया वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क पिछले कुछ वर्षों में दोबारा बनाई गई थी, लेकिन निर्माण के बाद गुणवत्ता और रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया गया। देखते ही देखते सड़क फिर से टूट गई और कई स्थानों पर चार से पांच फीट तक गहरे गड्ढे बन गए। बरसात के दौरान इन गड्ढों में पानी भर जाने से हादसे का खतरा और बढ़ जाता है। रोजाना गिर रहे राहगीर, बच्चों की बढ़ी मुश्किलें ग्रामीणों के मुताबिक सड़क पर जलभराव और गड्ढों के कारण आए दिन लोग गिरकर चोटिल हो रहे हैं। सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों को उठानी पड़ रही है। पानी से भरे गड्ढों की गहराई का अंदाजा नहीं लगने के कारण पैदल चलने वालों और बाइक सवारों के लिए रास्ता बेहद जोखिम भरा हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने सड़क की समस्या को लेकर कई बार क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और नेताओं से शिकायत की, लेकिन हर बार उन्हें आश्वासन ही मिला। समस्या जस की तस बनी रही। इसी से नाराज होकर ग्रामीणों ने प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज कराया। ‘सड़क नहीं तो वोट नहीं’ प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने क्षेत्रीय नेताओं के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और साफ चेतावनी दी कि जब तक गांव में सड़क और नाली की व्यवस्था दुरुस्त नहीं होती, तब तक वे चुनाव में वोट नहीं डालेंगे। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो नेताओं के गांव में प्रवेश का भी विरोध किया जाएगा। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार विकास के लिए करोड़ों रुपये की योजनाएं चला रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर तस्वीर इसके उलट दिखाई दे रही है। उनका दावा है कि सड़क कई बार बनाए जाने के बावजूद कुछ समय बाद फिर गड्ढों में तब्दील हो जाती है। इससे सरकारी धन के उपयोग और सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों ने उठाए निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल ग्रामीणों का कहना है कि यदि सड़क का निर्माण मानक के अनुरूप हुआ होता और समय-समय पर उसकी देखरेख की जाती तो इतनी जल्दी सड़क की हालत बदतर नहीं होती। उन्होंने सड़क के निर्माण में इस्तेमाल सामग्री और कार्य की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल सड़क की मरम्मत, जलनिकासी के लिए नाली निर्माण और पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि केवल आश्वासन से अब काम नहीं चलेगा। जब तक सड़क धरातल पर दुरुस्त नहीं होगी, उनका आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शन के दौरान कृष्ण मोहन अग्रहरि, अयोध्या प्रसाद गुप्ता, सतीश गुप्ता, संदीप अग्रहरि, आकाश अग्रहरि, शिवम अग्रहरि, अभिषेक अग्रहरि, धीरज अग्रहरि, झुल्ली चौरसिया, नगीना, इंद्रेश, राम अवतार, नींबू लाल, दुर्गेश, विपिन, गणेश गौतम, हरिश्चंद्र, राजेश, अर्जुन, शिवम, संतोष, राजेंद्र, कपिल, अंगद, विनोद समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।