प्रयागराज: मेजा के बोलम धाम में ललही छठ पर उमड़ी आस्था, महिलाओं
प्रयागराज: मेजा के बोलम धाम में ललही छठ पर उमड़ी आस्था, महिलाओं ने सुनी ललही मैया की कथा प्रयागराज। मेजा क्षेत्र के प्रसिद्ध बोलम धाम में ललही छठ के पावन पर्व पर श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह से ही बड़ी संख्या में महिलाएं व्रत रखकर पूजा-अर्चना के लिए बोलम धाम पहुंचीं। महिलाओं ने विधि-विधान से ललही मैया की पूजा कर अपने पुत्रों की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की। ललही छठ का पर्व माताओं के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं श्रद्धा भाव से व्रत रखकर अपने बच्चों की रक्षा, लंबी उम्र और उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हैं। बोलम धाम में भी महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना की। इस दौरान प्रतिमा शर्मा अंतिमा शर्मा प्रमिला देवी रितु केसरी प्रियंजली केसरी मुन्नी देवी, रंजना केशरवानी और चंदा मोदनवाल सहित कई महिला श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना में हिस्सा लिया। एक महिला श्रद्धालु ने ललही मैया से जुड़ी पारंपरिक कथा और व्रत की मान्यता के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि ललही छठ केवल एक पर्व नहीं, बल्कि माताओं के प्रेम, विश्वास और अपने बच्चों के प्रति समर्पण का प्रतीक है। पूजा के दौरान महिलाओं ने श्रद्धा के साथ ललही मैया का स्मरण किया और अपने पुत्रों की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य तथा परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना की। इस दौरान बोलम धाम का पूरा वातावरण भक्तिमय नजर आया। ललही छठ की पूजा में महुआ के फल चढ़ाने की विशेष परंपरा भी निभाई गई। इसके साथ ही महुआ की पत्तियों का उपयोग भोजन के लिए किया गया। श्रद्धालुओं ने पारंपरिक रूप से भैंस के दूध, घी और दही के साथ तैयार किए गए चीनी चावल का भी सेवन किया। सुबह से लेकर पूजा संपन्न होने तक बोलम धाम में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। महिलाओं ने ललही मैया से अपने परिवार और बच्चों के सुखी एवं मंगलमय जीवन की कामना की। रिपोर्टर आदित्य कुमार