*चोपन नगर पंचायत में शिलापट्टों पर शासनादेशों की अनदेखी का आरोप*

*चोपन नगर पंचायत में शिलापट्टों पर शासनादेशों की अनदेखी का आरोप* *2024-25 के कार्यों व धनराशि की जांच की मांग* *चोपन* (सोनभद्र)। नगर पंचायत चोपन में विकास कार्यों के शिलापट्टों पर शासन द्वारा जारी निर्देशों के उल्लंघन का आरोप सामने आया है। नगर में लगे कई शिलापट्टों पर नगर पंचायत अध्यक्ष का नाम अन्य जनप्रतिनिधियों की तुलना में अत्यधिक बड़े अक्षरों में अंकित कराया गया है, जबकि नगर विकास विभाग, उत्तर प्रदेश शासन द्वारा जारी शासनादेशों में सभी नामों को समान फॉन्ट साइज में अंकित करने के स्पष्ट निर्देश हैं। नगर विकास विभाग द्वारा समय-समय पर शिलापट्टों के संबंध में शासनादेश जारी किए गए हैं, जिनमें शासनादेश संख्या 399/2016, 6711/2021, 7158/2023, 3104/2025 तथा प्रमुख सचिव नगर विकास का पत्रांक 4589 दिनांक 31 जुलाई 2025 प्रमुख हैं। इन आदेशों में स्पष्ट किया गया है कि मुख्यमंत्री एवं मंत्रियों के अतिरिक्त अन्य जनप्रतिनिधियों के नाम समान आकार में होंगे तथा किसी अधिकारी का नाम शिलापट्ट पर अंकित नहीं किया जाएगा। निर्देश संख्या-6 के तहत जांच की मांग प्रमुख सचिव नगर विकास के उक्त पत्र के निर्देश संख्या-6 में यह भी उल्लेख है कि यदि शिलापट्टों में शासनादेशों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित नगर निकाय को दी गई समस्त धनराशि, कार्यों और भुगतान की विस्तृत जांच आवश्यक होगी। इसी आधार पर नगर पंचायत चोपन के वर्ष 2024-25 सहित पूर्व वर्षों के समस्त कार्यों और वित्तीय आवंटन की जांच की मांग की गई है। *2012 से लगातार एक ही परिवार* * शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि जुलाई 2012 से अब तक नगर पंचायत चोपन में एक ही परिवार के सदस्य अध्यक्ष पद पर रहे हैं। पहले इम्तियाज अहमद, फिर उनकी पत्नी फरीदा बेगम और वर्तमान में उस्मान अली अध्यक्ष हैं। आरोप है कि इस पूरे कार्यकाल में नगर के अधिकांश शिलापट्टों पर अध्यक्ष पद पर आसीन व्यक्ति का नाम सबसे बड़े अक्षरों में लिखवाया गया। जांच तक वित्तीय रोक की मांग शिकायतकर्ता द्वारा मांग की गई है कि नगर पंचायत चोपन में लगे सभी शिलापट्टों की वार्ड-वार जांच कराई जाए तथा जांच पूरी होने तक आगामी विकास कार्यों के लिए नई धनराशि के आवंटन पर रोक लगाई जाए। मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचा मामला मामले की शिकायत नगर विकास विभाग एवं मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजे जाने की बात कही गई है। अब यह देखना होगा कि शासन स्तर पर इस प्रकरण में क्या कार्रवाई होती है।