कौड़ीराम में कैंसर के खिलाफ जागरूकता की मुहिम, 126 मरीजों की हुई

कौड़ीराम में कैंसर के खिलाफ जागरूकता की मुहिम, 126 मरीजों की हुई जांच गुटखा-तंबाकू से बढ़ रहा मुंह के कैंसर का खतरा, विशेषज्ञों ने चेताया—लक्षण दिखें तो झाड़-फूंक में समय गंवाने के बजाय डॉक्टर से मिलें कौड़ीराम, गोरखपुर। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने और समय रहते संभावित मरीजों की पहचान करने के उद्देश्य से शुक्रवार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कौड़ीराम में नि:शुल्क कैंसर जांच एवं जागरूकता शिविर लगाया गया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी, गोरखपुर के सहयोग से हनुमान प्रसाद पोद्दार कैंसर अस्पताल एवं शोध संस्थान, गीता वाटिका की ओर से आयोजित इस शिविर में 126 मरीज पहुंचे और कैंसर से जुड़ी अपनी शंकाओं का समाधान कराया। सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक चले शिविर में अस्पताल की चिकित्सक डॉ. आस्था राव ने मरीजों की प्राथमिक जांच की, संभावित लक्षणों की पड़ताल की और उन्हें उचित चिकित्सकीय परामर्श दिया। मरीजों को नि:शुल्क दवाएं भी उपलब्ध कराई गईं। शिविर के जरिए आशा कार्यकर्ताओं और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को भी कैंसर के लक्षण, बचाव और समय पर उपचार के प्रति जागरूक किया गया। गुटखा-खैनी की लत बन रही बड़ी चिंता शिविर प्रबंधक अजय श्रीवास्तव ने पूर्वांचल, बिहार और नेपाल सीमावर्ती क्षेत्रों में गुटखा, खैनी और तंबाकू के सेवन से मुंह के कैंसर के बढ़ते खतरे पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों में जागरूकता की कमी और बीमारी को छिपाने की प्रवृत्ति के कारण कई लोग समय पर जांच और उपचार के लिए आगे नहीं आते। कैंसर के प्रति जागरूकता फैलाना और लोगों को जांच के लिए प्रेरित करना बेहद जरूरी है। मुंह में छाले, स्तन में गांठ को न करें नजरअंदाज डॉ. आस्था राव ने बताया कि मुंह में लंबे समय तक छाले या सफेद दाग बने रहना, मुंह खोलने में परेशानी और जलन जैसे लक्षणों की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। इसी तरह स्तन में गांठ, कांख में सूजन, निपल से असामान्य स्राव या स्तन की त्वचा में बदलाव होने पर चिकित्सकीय जांच जरूरी है। महिलाओं को स्तन की स्वयं जांच करने की विधि भी समझाई गई। उन्होंने गर्भाशय मुख (सर्वाइकल) कैंसर के संभावित लक्षणों, जैसे माहवारी के बीच या संभोग के बाद रक्तस्राव तथा रजोनिवृत्ति के बाद रक्तस्राव के प्रति भी सतर्क रहने की सलाह दी। साथ ही एचपीवी टीकाकरण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि बचाव के उपायों और समय पर चिकित्सकीय परामर्श से कैंसर का खतरा कम करने में मदद मिल सकती है। झाड़-फूंक में समय गंवाना पड़ सकता है भारी प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. संतोष कुमार वर्मा ने स्पष्ट कहा कि कैंसर की आशंका होने पर झाड़-फूंक या घरेलू नुस्खों के भरोसे समय बर्बाद नहीं करना चाहिए। बिना देरी विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना जरूरी है, क्योंकि समय पर पहचान और उचित उपचार से बेहतर परिणाम की संभावना बढ़ती है। डॉ. विनय श्रीवास्तव ने कहा कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर ऐसे शिविर आयोजित होने से ग्रामीण आबादी तक कैंसर संबंधी जानकारी पहुंचती है और लोगों को जांच कराने के लिए प्रोत्साहन मिलता है। जागरूकता सामग्री बांटकर दिया बचाव का संदेश शिविर में उपस्थित लोगों को कैंसर से संबंधित पर्चे, विवरणिकाएं, फ्लिपबुक, पोस्टर और चित्रयुक्त पुस्तिकाएं वितरित की गईं, ताकि वे अपने गांवों और आसपास के क्षेत्रों में भी जागरूकता अभियान चला सकें। शिविर की सफलता में डॉ. संतोष कुमार वर्मा, डॉ. विनय श्रीवास्तव, डॉ. आस्था राव, अजय श्रीवास्तव, सत्यवती तिवारी, विकास चक्रधारी, बृजेश पाण्डेय सहित स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सकों और कर्मचारियों का विशेष योगदान रहा।