✨ भक्ति में डूबा घघसरा: नंदोत्सव से गूंजा पांडाल, राघव ऋषि के प्रवचन ने छुआ हर हृदय

घघसरा बाजार स्थित राधा-कृष्ण मैरेज वाटिका में श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस पर ऐसा आध्यात्मिक समागम देखने को मिला, जिसने पूरे माहौल को ब्रजधाम बना दिया। पूज्य राघव ऋषि जी के श्रीमुख से निकले वचन— 👉 “भोजन सरस होगा तो भजन नीरस होगा” ने श्रोताओं को गहरे चिंतन में डाल दिया। 🌼 नंदोत्सव में उमड़ा भक्तों का सैलाब जैसे ही नंद महोत्सव की शुरुआत हुई, पूरा पांडाल “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयघोष से गूंज उठा। सौरभ ऋषि जी के भजन पर श्रद्धालु झूम उठे, पुष्पवृष्टि हुई और माखन प्रसाद वितरित कर बालकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया। 🧠 ज्ञान की गूंज: मन ही बनाता है गोपी राघव ऋषि जी ने कहा कि सच्ची भक्ति इंद्रियों से नहीं, बल्कि मन की पवित्रता से होती है। शरीर मथुरा है, हृदय गोकुल पवित्र मन ही माखन है जिस हृदय में शुद्धता है, वहीं भगवान निवास करते हैं 🔥 पूतना वध से मिला गहरा संदेश उन्होंने बताया कि “पूतना” केवल एक राक्षसी नहीं, बल्कि अपवित्र विचारों का प्रतीक है। सुंदर रूप लेकिन दूषित कर्म—यही पूतना का वास्तविक अर्थ है। 🎶 भजन और लीला ने बांधा समां “जरी की पगड़ी बांधे” और “श्री गोवर्धन महाराज” जैसे भजनों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। माखनचोरी लीला और गोपियों के प्रेम का भावपूर्ण वर्णन सुनकर श्रोता भावविभोर हो गए। ⛰️ गोवर्धन लीला: इन्द्रियों के दमन का संदेश गोवर्धन लीला को समझाते हुए ऋषिजी ने कहा— 👉 “गो” का अर्थ है भक्ति, और उसे बढ़ाने वाली लीला ही गोवर्धन है। भगवान द्वारा गिरिराज धारण करने की कथा ने भक्तों में आस्था और समर्पण का संचार किया। 🙏 भव्य आरती और आयोजन मुख्य यजमान श्रीमती सुभावती देवी ने सपरिवार पूजन किया। क्षेत्र के अनेक गणमान्य लोगों ने आरती में भाग लिया और आयोजन को सफल बनाया। 📅 कल का आकर्षण: कृष्ण-रुक्मिणी विवाह समिति संयोजक अशोक अग्रहरि ने बताया कि बुधवार को श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह का भव्य प्रसंग और बारात निकाली जाएगी, जिसकी तैयारियां जोरों पर हैं। 👉 कुल मिलाकर, यह आयोजन सिर्फ कथा नहीं, बल्कि भक्ति, ज्ञान और आनंद का अद्भुत संगम बन गया।