लखनऊ का अनोखा मामला, बेटे से एक साल छोटी निकली मां, आधार

लखनऊ का अनोखा मामला, बेटे से एक साल छोटी निकली मां, आधार कार्ड देख अफसर भी हैरान; बेटा बोला- कोर्ट जाऊंगा लखनऊ में आधार कार्ड की गलती से एक महिला की उम्र बेटे से कम दर्ज हो गई है। सही उम्र 60 वर्ष होने के बावजूद दस्तावेज में 31 वर्ष लिखी है। परिवार दो साल से सुधार के लिए भटक रहा है, लेकिन कोई समाधान नहीं मिला, अब कोर्ट जाने की तैयारी है। सरकारी दस्तावेजों में एक अनोखी विसंगति सामने आई है। एक मां की आयु उसके पुत्र से एक वर्ष कम हो गई है। इस त्रुटि को सुधारने के लिए परिजन पिछले दो वर्ष से विभिन्न सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। उन्हें हर जगह निराशा ही हाथ लगी है। आयु निर्धारण के लिए शुक्रवार को परिजन सीएमओ कार्यालय भी पहुंचे। वहां अधिकारियों ने बताया कि उनके पास इस तरह के मामलों में जांच के कोई आदेश नहीं है, इसलिए वह कुछ नहीं कर सकते। आधार कार्ड में हुई गलती बनी सिरदर्द बंथरा हरौनी की निवासी नीता की वास्तविक उम्र करीब 60 वर्ष है। वह आधार कार्ड में दर्ज अपनी उम्र के कारण परेशान हैं। आधार कार्ड में जन्मतिथि एक जनवरी 1995 दर्ज है, जबकि उनके बेटे शैलेंद्र की जन्मतिथि एक जनवरी 1996 दर्ज है। इस गड़बड़ी ने नीता के लिए एक बड़ी समस्या खड़ी कर दी है। उन्होंने आधार कार्ड कार्यालय में कई बार अपनी उम्र सही कराने के लिए प्रयास किया लेकिन हर बार उनका आवेदन निरस्त कर दिया गया। सीएमओ कार्यालय से भी मिली निराशा आधार कार्ड में सुधार न होने के बाद नीता ने अपनी आयु का निर्धारण करवाने के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय में आवेदन किया। परिजन जब सीएमओ कार्यालय के अधिकारियों से मिले तो उन्होंने चिकित्सकीय परीक्षण के जरिये आयु निर्धारण करने से मना कर दिया। नीता ने सीएमओ कार्यालय में परिवार रजिस्टर समेत अन्य साक्ष्य भी दिखाए। परिवार रजिस्टर में नीता की उम्र 60 वर्ष दर्ज है, जो आधार कार्ड में दर्ज उम्र से काफी भिन्न है। विभागीय मांग पर गठित होगा बोर्ड सीएमओ डॉ. एनबी सिंह ने बताया कि आयु निर्धारण के लिए विभाग के पास फिलहाल कोई ऐसा आदेश नहीं है जिसके आधार पर जांच कर उम्र तय की जा सके। उन्होंने कहा कि यदि किसी अन्य विभाग से इस संबंध में पत्र भेजा जाता है तो आयु निर्धारण के लिए एक बोर्ड गठित कर जांच की जा सकती है। बेटे ने कहा...कोर्ट में करेंगे गुहार बेटे शैलेंद्र का कहना है कि वह पिछले दो वर्ष से एक से दूसरे विभाग की दौड़ लगा रहे हैं लेकिन उन्हें कहीं से भी कोई मदद नहीं मिल रही है। लगता है अब कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा तभी मां की सही उम्र का निर्धारण हो सकेगा।