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Rajkumar Raj
Gorakhpur१३ दिन पहले

बुढ़िया बारी पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दिवंगत सुशील कुमार यादव के चित्र

बुढ़िया बारी पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दिवंगत सुशील कुमार यादव के चित्र

बुढ़िया बारी पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दिवंगत सुशील कुमार यादव के चित्र पर पुष्प अर्पित कर शोकाकुल परिजनों को ढांढस बंधाया गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं गोरखनाथ पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ आज गोरखपुर के बुढ़िया बारी स्थित उत्तर प्रदेश कबड्डी संघ के उपाध्यक्ष एवं पूर्वोत्तर रेलवे के सेवानिवृत्त चीफ टीटीआई स्व. सुशील कुमार यादव के पैतृक आवास पहुंचे। मुख्यमंत्री ने दिवंगत सुशील यादव के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और शोकाकुल परिवारजनों से भेंट कर इस असहनीय दुःख की घड़ी में ढांढस बंधाया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परिजनों से आत्मीय बातचीत करते हुए कहा कि सुशील कुमार यादव का आकस्मिक निधन न केवल उनके परिवार, बल्कि खेल जगत, समाज और गोरखपुर जनपद के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा कि कबड्डी के क्षेत्र में सुशील यादव का योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। उन्होंने अपने जीवन में अनुशासन, परिश्रम और समर्पण के साथ खेल एवं समाज की सेवा की, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। मुख्यमंत्री ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति एवं परिवार को इस गहन दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार शोक संतप्त परिवार के साथ हर संभव सहयोग के लिए सदैव तत्पर रहेगी। मुख्यमंत्री के आगमन से परिवारजनों को गहरा संबल मिला। उनके साथ क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, समाजसेवी, खेल जगत से जुड़े लोग एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने दिवंगत सुशील कुमार यादव के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। उल्लेखनीय है कि सुशील कुमार यादव गोरखनाथ मंदिर से पीढ़ियों से जुड़े प्रतिष्ठित परिवार से थे। ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज, ब्रह्मलीन महंत अवैद्यनाथ जी महाराज तथा वर्तमान पीठाधीश्वर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का इस परिवार पर सदैव आशीर्वाद रहा है। इसी पारिवारिक और आत्मीय संबंध के चलते मुख्यमंत्री स्वयं शोक संवेदना व्यक्त करने बुढ़िया बारी पहुंचे। मुख्यमंत्री की यह संवेदनशील उपस्थिति क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी रही और लोगों ने इसे मानवीय संवेदना व सामाजिक सरोकार का प्रतीक बताया।

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