**बेलघाट का दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर : हमारी आस्था और हमारी पहचान। **

**बेलघाट का दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर : हमारी आस्था और हमारी पहचान। ** गोरखपुर की धरती अपनी धार्मिक परंपराओं, लोकविश्वासों और सांस्कृतिक विरासत के लिए सदैव प्रसिद्ध रही है। इसी धरती के बेलघाट क्षेत्र में स्थित दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर हमारे लिए केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि क्षेत्र की आस्था, स्मृतियों और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा एक भावनात्मक केंद्र है। यहां पहुंचते ही मन में एक अलग प्रकार की शांति और श्रद्धा का अनुभव होता है। स्थानीय लोगों के बीच इस मंदिर को लेकर अनेक वर्षों से आस्था और विश्वास की परंपरा चली आ रही है। मंदिर की उत्पत्ति से जुड़ी लोककथा के अनुसार, कभी यह क्षेत्र घने जंगल से घिरा हुआ था। इसी परिवेश में पीपल के वृक्ष से हनुमान जी की प्रतिमा प्रकट होने की कथा आज भी बुजुर्गों की स्मृतियों और स्थानीय जनमानस में जीवित है। यह कथा चाहे ऐतिहासिक अभिलेखों में प्रमाणित हो या न हो, लेकिन बेलघाट के लोगों की आस्था में इसका विशेष स्थान है। यही लोकस्मृतियां किसी स्थान को केवल भौगोलिक पहचान नहीं देतीं, बल्कि उसे भावनात्मक पहचान भी प्रदान करती हैं। समय बदला, परिस्थितियां बदलीं और मंदिर का स्वरूप भी विकसित होता गया। आज यहां पुराने धार्मिक स्थल के साथ नए निर्माण और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विकसित होता परिसर दिखाई देता है। मंदिर का यह बदलता स्वरूप बताता है कि हमारी परंपराएं समय के साथ आगे बढ़ते हुए भी अपनी मूल आस्था को बनाए रख सकती हैं। मंदिर के विकास के लिए शासन स्तर पर भी योजनाएं बनाई गई हैं और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बढ़ाने के प्रयास हुए हैं। बेलघाट के लोगों के लिए यह मंदिर उनकी अपनी मिट्टी, अपनी परंपरा और अपनी आस्था का प्रतीक है। यहां आने वाला व्यक्ति केवल दर्शन करके वापस नहीं लौटता, बल्कि अपने साथ इस स्थान की शांति और अपनापन भी लेकर जाता है। आज आवश्यकता है कि इस ऐतिहासिक एवं धार्मिक धरोहर को केवल धार्मिक दृष्टि से नहीं, बल्कि स्थानीय इतिहास, लोकसंस्कृति और सामुदायिक विरासत के रूप में भी संरक्षित किया जाए। आने वाली पीढ़ियां जब बेलघाट के इतिहास को देखें, तो उन्हें इस मंदिर में अपने पूर्वजों की आस्था और अपनी मिट्टी की पहचान दिखाई दे। दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर बेलघाट की पहचान है—और इसकी पहचान को जीवित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। **डाॅ विजय प्रकाश त्रिपाठी असिस्टेंट प्रोफेसर हीरालाल रामनिवास पी जी कालेज खलीलाबाद संत कबीर नगर। **