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Lucknowलगभग १ घंटा पहले

लखनऊ ललित के पार्षद पद की शपथ लेने के बाद महापौर के

लखनऊ ललित के पार्षद पद की शपथ लेने के बाद महापौर के

लखनऊ ललित के पार्षद पद की शपथ लेने के बाद महापौर के अधिकार बहाल लखनऊ। ललित तिवारी को पार्षद पद की शपथ दिलाए जाने के साथ ही महापौर सुषमा खर्कवाल के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार बहाल हो गए हैं। हाईकोर्ट ने 21 मई को आदेश का पालन न करने पर उनके अधिकार सीज कर दिए थे। अब महापौर फिर से वित्तीय और प्रशासनिक फैसले ले सकेंगी और आदेश जारी कर सकेंगी। इससे 26 मई को प्रस्तावित महापौर के तीन साल का कार्यकाल पूरा होने पर होने वाले आयोजन पर भी कानूनी संकट टल गया है।हाईकोर्ट ने 21 मई को महापौर के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज करते हुए स्पष्ट किया था कि 13 मई के आदेश का अनुपालन कराने के लिए उन्हें ललित तिवारी को शपथ दिलाने की छूट रहेगी। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 29 मई तय करते हुए महापौर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया था। रविवार को महापौर ने हाईकोर्ट के आदेश का पालन करते हुए ललित तिवारी को शपथ दिला दी। इसके बाद नगर निगम और राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई कि आदेश का अनुपालन होते ही क्या महापौर के अधिकार स्वतः बहाल हो गए हैं या हाईकोर्ट करेगा। कहा ये भी जा रहा है कि सोमवार को महापौर की ओर से हाईकोर्ट में अधिवक्ता के जरिये आदेश के अनुपालन की जानकारी दी जाएगी। वहीं, अधिवक्ता के तौर पर पार्षद ललित तिवारी ने बताया कि 13 मई के आदेश का पालन हो चुका है और 21 मई को हाईकोर्ट ने भी इसी आदेश के अनुपालन पर जोर दिया था। ऐसे में महापौर के सीज अधिकार अब प्रभावी रूप से बहाल माने जाएंगे। नगर आयुक्त गौरव कुमार ने भी बताया कि सोमवार को हाईकोर्ट में शपथ पत्र दाखिल कर पूरी जानकारी दी जाएगी। दूर हुई बाधा, होगा भव्य आयोजनमहापौर के कार्यकाल के तीन साल पूरे होने पर 26 मई को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में नगर निगम की ओर से भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई विशिष्ट अतिथियों के शामिल होने की संभावना है। कार्यक्रम में तीन वर्षों के विकास कार्यों पर आधारित स्मारिका का विमोचन, लोकार्पण और शिलान्यास भी प्रस्तावित हैं। जानकारों के मुताबिक, यदि समय रहते ललित तिवारी को शपथ नहीं दिलाई जाती तो यह आयोजन कानूनी विवाद में फंस सकता था। ऐसे में या तो कार्यक्रम की तारीख आगे बढ़ानी पड़ती या फिर पहले शपथ प्रक्रिया पूरी करनी होती।

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