विश्व स्तनपान सप्ताह: नुक्कड़ नाटकों के जरिए गांव-गांव पहुंचा मातृ एवं शिशु
विश्व स्तनपान सप्ताह: नुक्कड़ नाटकों के जरिए गांव-गांव पहुंचा मातृ एवं शिशु पोषण का संदेश सहजनवा, गोरखपुर। विश्व स्तनपान सप्ताह के अवसर पर बाल विकास विभाग, गोरखपुर एवं प्रोग्रेसिव फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को सहजनवा विकास खंड के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) सहजनवा तथा बेलहर और जुड़ियन गांवों में मातृ एवं शिशु पोषण जागरूकता अभियान के तहत नुक्कड़ नाटकों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीणों को मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, स्तनपान, कुपोषण की रोकथाम और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. व्यास कुशवाहा एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी ऋचा पांडेय ने किया। डॉ. व्यास कुशवाहा ने कहा कि जन्म के एक घंटे के भीतर नवजात को मां का पहला गाढ़ा पीला दूध (कोलोस्ट्रम) अवश्य पिलाना चाहिए। उन्होंने बताया कि जन्म से छह माह तक केवल मां का दूध ही शिशु के लिए सर्वोत्तम आहार है तथा कुपोषण की रोकथाम के लिए संतुलित पोषण और नियमित स्वास्थ्य जांच आवश्यक है। बाल विकास परियोजना अधिकारी ऋचा पांडेय ने कहा कि कुपोषित बच्चों का प्रबंधन घर पर भी प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। उन्होंने बच्चों के भोजन में कम से कम चार खाद्य समूह शामिल करने, दूध एवं दुग्ध उत्पादों का नियमित सेवन कराने तथा पौष्टिक आहार अपनाने की अपील की। साथ ही प्रोग्रेसिव फाउंडेशन की इस पहल की सराहना की। "सही पोषण–स्वस्थ बचपन" विषय पर आधारित नुक्कड़ नाटक में कलाकारों ने गीत, संवाद और अभिनय के माध्यम से गर्भवती महिलाओं की देखभाल, सुरक्षित संस्थागत प्रसव, छह माह तक केवल स्तनपान, समय पर पूरक आहार, नियमित टीकाकरण और कुपोषण की पहचान जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रभावी संदेश दिए। कार्यक्रम में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा बहुओं, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, प्रोग्रेसिव फाउंडेशन के प्रतिनिधियों तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। अंत में ऋचा पांडेय ने बताया कि यह जागरूकता अभियान 1 से 3 अगस्त 2026 तक सहजनवा, उरुवा और खोराबार विकास खंड के चयनित गांवों में संचालित किया जाएगा, ताकि "सही पोषण–देश रोशन" का संदेश अधिक से अधिक परिवारों तक पहुंचाया जा सके।