*खाकी का मानवीय चेहरा: किराये के लिए दिए 500 रुपये, वृद्ध महिला

*खाकी का मानवीय चेहरा: किराये के लिए दिए 500 रुपये, वृद्ध महिला को मिला जिंदगी भर का भरोसा* धनघटा/संत कबीर नगर। खाकी वर्दी केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने का प्रतीक नहीं, बल्कि मानवता, संवेदनशीलता और जनसेवा का भी परिचायक है। इसका जीवंत उदाहरण मंगलवार को धनघटा थाने में देखने को मिला, जब थाना प्रभारी दिलीप सिंह ने एक जरूरतमंद वृद्ध महिला की आर्थिक मजबूरी को समझते हुए अपनी जेब से 500 रुपये देकर न केवल उसकी मदद की, बल्कि पुलिस के प्रति उसका भरोसा भी मजबूत कर दिया। मंगलवार को थाना प्रभारी दिलीप सिंह थाने में फरियादियों की समस्याएं सुन रहे थे। इसी दौरान एक वृद्ध महिला अपनी जमीन से जुड़े विवाद को लेकर प्रार्थना पत्र लेकर पहुंची। आवेदन देखने के बाद थाना प्रभारी ने महिला को आश्वस्त किया कि शनिवार को लेखपाल की मौजूदगी में मामले की जांच कराकर उचित कार्रवाई की जाएगी। इस पर वृद्ध महिला ने भावुक होकर बताया कि उसके पास दोबारा थाने आने के लिए किराये तक के पैसे नहीं हैं। महिला की आर्थिक स्थिति और उसकी बेबसी देखकर थाना प्रभारी दिलीप सिंह तुरंत अपनी कुर्सी से उठे और जेब से 500 रुपये निकालकर महिला को देते हुए कहा कि वह शनिवार को अवश्य आए, ताकि उसकी समस्या का समाधान कराया जा सके। थाना प्रभारी की इस संवेदनशीलता से वृद्ध महिला की आंखें नम हो गईं। उसके लिए यह राशि केवल किराये के पैसे नहीं, बल्कि व्यवस्था पर दोबारा विश्वास करने की एक नई उम्मीद थी। थाने में मौजूद लोगों ने भी इस मानवीय पहल की सराहना की। दिलचस्प बात यह रही कि जब इस पूरे घटनाक्रम की तस्वीर कैमरे में कैद हुई तो थाना प्रभारी ने पत्रकारों से इसे प्रकाशित न करने का आग्रह किया। उनका कहना था कि उन्होंने यह मदद किसी प्रचार-प्रसार के लिए नहीं, बल्कि अपने कर्तव्य और इंसानियत के नाते की है। जनपद में पुलिस अधीक्षक संदीप मीणा के नेतृत्व में पुलिस की कार्यशैली लगातार अधिक जनोन्मुखी और संवेदनशील होती दिखाई दे रही है। धनघटा थाने की यह घटना इसी सकारात्मक बदलाव की मिसाल है। यह संदेश देती है कि पुलिस केवल कानून की रक्षक ही नहीं, बल्कि जरूरतमंदों की सच्ची सहायक भी है। यह छोटी-सी मदद भले ही 500 रुपये की थी, लेकिन उसने एक वृद्ध महिला को जिंदगी भर का भरोसा दे दिया कि खाकी में आज भी इंसानियत जिंदा है।