*अब आश्वासन नहीं, शासनादेश चाहिए' - लखनऊ में बॉन्ड वाले डॉक्टरों का

*अब आश्वासन नहीं, शासनादेश चाहिए' - लखनऊ में बॉन्ड वाले डॉक्टरों का प्रदर्शन, बोले - डिप्टी CM भूल गए वादा *लखनऊ।* समान वेतन की मांग को लेकर यूपी के अलग-अलग जिलों से आए बॉन्ड वाले MBBS डॉक्टरों ने लखनऊ में फिर से प्रदर्शन शुरू कर दिया है। डॉक्टरों का आरोप है कि 2 सितंबर को गांधी प्रतिमा पर प्रदर्शन के दौरान डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने बारिश में भागते हुए उनसे मांग पूरी करने का वादा किया था, लेकिन 19 दिन बाद भी शासनादेश जारी नहीं हुआ है। डॉक्टरों ने डिप्टी सीएम के सोशल मीडिया पोस्ट को पोस्टर बनाकर विरोध जताया। पोस्टर पर लिखा था - "अब आश्वासन नहीं, शासनादेश चाहिए, वादों की नहीं, अधिकारों की आवाज चाहिए।" *क्या है पूरा मामला?* प्रदर्शनकारी डॉक्टरों का कहना है कि सभी के पास समान MBBS डिग्री और समान बॉन्ड है, सेवा भी समान है, लेकिन वेतन अलग-अलग दिया जा रहा है। - ग्रामीण क्षेत्रों के CHC, PHC और दूसरे सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में तैनात मेडिकल ऑफिसरों को करीब 50 से 55 हजार रुपये महीना मानदेय मिल रहा है। - वहीं, सरकारी मेडिकल कॉलेजों में बॉन्ड सेवा कर रहे डॉक्टरों को करीब 1.10 लाख रुपये महीना दिया जा रहा है। बॉन्ड सेवा के तहत डॉक्टरों को दो साल की अनिवार्य सरकारी सेवा करनी होती है या 10 लाख रुपये के बॉन्ड की शर्त पूरी करनी पड़ती है। डॉक्टरों ने समान वेतन लागू करने के साथ लंबित एरियर के भुगतान की भी मांग की है। *'14 महीने से भटक रहे हैं'* डॉ. अजय सोलंकी ने बताया कि वे उत्तर प्रदेश में मेडिकल ऑफिसर के रूप में काम कर रहे हैं। 2 सितंबर को प्रदर्शन के दौरान डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक उनसे मिलने पहुंचे थे और कहा था - 'आप हमारे बच्चे हैं, आपकी मांग जरूर पूरी होगी।' उन्होंने 3 सितंबर को दोपहर 2 बजे तक शासनादेश जारी होने का आश्वासन दिया था। डॉक्टरों का कहना है, "हम लोग 14 महीने से चक्कर काट रहे हैं। पाठक जी ने आकर हमसे मुलाकात की और मीठी गोली दे दी। अपना जनपद छोड़ कर तीन दिन से हम लखनऊ में भटक रहे हैं मगर कोई बात सुनने को तैयार नहीं है। ब्रजेश पाठक ने शासनादेश का आश्वासन देकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करके पब्लिक सिटी बटोर ली, मगर हमें हमारा अधिकार नहीं दिया। हमसे वादा डिप्टी सीएम ने किया था, वो इस विभाग के मुखिया हैं इसीलिए हम बार-बार उनके पास आ रहे हैं।"