फाइलेरिया उन्मूलन या फाइलों का खेल सुल्तानपुर में पूरा स्वास्थ्य तंत्र सवालों
फाइलेरिया उन्मूलन या फाइलों का खेल सुल्तानपुर में पूरा स्वास्थ्य तंत्र सवालों के घेरे में नाइट ब्लड सर्वे, लैब जांच और रिपोर्टिंग सिस्टम पर उठे गंभीर प्रश्न सुल्तानपुर। राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम (NPELF) के तहत सुल्तानपुर जनपद में चल रहे फाइलेरिया नियंत्रण अभियान की जमीनी सच्चाई अब सरकारी दावों पर भारी पड़ती नजर आ रही है। सवाल अब किसी एक कर्मचारी या अधिकारी का नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली, निगरानी व्यवस्था और जवाबदेही तंत्र पर खड़े हो रहे हैं। *सूत्रों के अनुसार* फाइलेरिया जैसे गंभीर वेक्टर जनित रोग में जिस वैज्ञानिक और पारदर्शी प्रक्रिया की अपेक्षा की जाती है, वह सुल्तानपुर में कागजों तक सीमित दिख रही है। मरीजों की पहचान, नाइट ब्लड सर्वे, लैब *जांच और रिपोर्टिंग—* तीनों स्तरों पर सिस्टम फेल्योर के संकेत मिल रहे हैं। जब नियम व्यवस्था से हार जाएं स्वास्थ्य मंत्रालय व राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के दिशा-निर्देश साफ हैं— *नाइट ब्लड सर्वे रात्रि में, मौके पर किया जाना अनिवार्य* प्रत्येक सैंपल की माइक्रोस्कोपिक लैब जांच पॉजिटिव मरीजों का पूरा दस्तावेजी रिकॉर्ड स्लाइड रजिस्टर, मरीज सूची और मासिक रिपोर्ट में पूर्ण सामंजस्य *लेकिन सुल्तानपुर में बड़ा सवाल यह है कि—* 👉 क्या विभागीय निगरानी तंत्र ने कभी इन मानकों की जमीनी पड़ताल की? 👉 या फिर आंकड़ों की पूर्ति को ही उन्मूलन की सफलता मान लिया गया? सिर्फ आंकड़े नहीं, जनस्वास्थ्य दांव पर यदि बिना नाइट ब्लड सर्वे और प्रयोगशाला पुष्टि के मरीज “पॉजिटिव” घोषित किए गए, तो यह महज लापरवाही नहीं बल्कि जनस्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ है। *गलत आंकड़ों के आधार पर—* दवाओं का वितरण संसाधनों का आवंटन और भविष्य की स्वास्थ्य नीति सब कुछ प्रभावित होता है। निगरानी तंत्र की चुप्पी भी कटघरे में *फाइलेरिया कार्यक्रम की मॉनिटरिंग सिर्फ फील्ड स्टाफ* *तक सीमित नहीं होती।* इसमें— बायोलॉजिस्ट कार्यक्रम प्रभारी जिला स्तरीय अधिकारी और अंततः स्वास्थ्य विभाग का शीर्ष प्रशासन सभी की सामूहिक जिम्मेदारी तय होती है। *ऐसे में सवाल उठता है—* 👉 यदि प्रक्रियागत खामियां हैं, तो वर्षों तक विभागीय ऑडिट और समीक्षा बैठकों में यह कैसे नजर नहीं आया? 👉 या फिर सबकुछ जानते हुए भी नजरअंदाज किया गया? *कानून क्या कहता है, विभाग कितना जवाबदेह?* Clinical Establishments Act और NVBDCP के तहत— रिकॉर्ड की पारदर्शिता जांच प्रक्रिया का प्रमाण आंकड़ों की सत्यता कानूनी बाध्यता है। इनका उल्लंघन होने पर केवल जांच नहीं, बल्कि दंडात्मक कार्रवाई का भी स्पष्ट प्रावधान है। सीएमओ के बयान से बढ़ी उम्मीद, लेकिन सवाल बरकरार मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. भरत भूषण ने जांच के संकेत जरूर दिए हैं, लेकिन जनमानस की अपेक्षा है कि— *जांच केवल औपचारिक न हो* *जिम्मेदारी नीचे से ऊपर तक तय हो* और दोष सिस्टम स्तर पर चिन्हित किए जाएं *जनता पूछ रही है — जवाब कौन देगा?* स्थानीय नागरिकों और जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों की मांग है कि— वास्तविक फाइलेरिया मरीजों की संख्या सार्वजनिक हो नाइट ब्लड सर्वे और लैब जांच की फील्ड रिपोर्ट सामने आए वर्षों से चली आ रही विभागीय चुप्पी की जिम्मेदारी तय हो ताकि फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम सरकारी फाइलों की सफलता कहानी नहीं, बल्कि वास्तविक जनस्वास्थ्य उपलब्धि बन सके।