अपनों की 'अदावत' से 'सरकंडी' के 'महाराज' का 'हिल' गया 'सिंहासन'

अपनों की 'अदावत' से 'सरकंडी' के 'महाराज' का 'हिल' गया 'सिंहासन' विरोधियों की चालों का काट नहीं ढूंढ पाए संतोष! प्रधान पत्नी को जेल के बाद खुद पर ₹25 हजार के ईनाम ने लगाया साख पर बट्टा! मदद को आस वाले हर दरवाजे की खटखटाई कुंडी पर कहीं नहीं मिला सहारा! महाराज का गुरूर तोड़ पूर्व प्रमुख सुधीर त्रिपाठी तलाश रहे नई राजनीतिक जमीन! मदद को लेकर दो खेमों में बंट गयी भाजपा,सत्ता के गलियारों तक खूब दौड़े मददगार! धरी रह गयी सत्ता,पावर,रुतबा और पैसा,नहीं आया कुछ काम! विरोधियों ने शासन तक बनायी पहुंच तो मदद की नाकाम हो गई हर कोशिश! स्टे ना मिलता तो देखने को मिलता कुछ और बड़ा कारनामा! गांव की सरजमीं से अपना रुतबा कायम करने वाले संतोष द्विवेदी की अपनों से 'अदावत' हुई तो सरकंडी के 'महाराज' का सिंहासन हिल गया। ढाई दशक से गांव में राज करने वाले संतोष के विरोध में विकास कार्यों के लिए आए धन के घोटाले के स्वर ग्रामीणों ने तेज किया।राजनीति सहित उनके अन्य विरोधियों ने जो हवा दी उसे पूर्व ब्लाक प्रमुख सुधीर त्रिपाठी ने अपने एक विधायक साथी के सहयोग से आंधी बना दिया। पहले पत्नी को जेल और फिर खुद पर ईनाम।हालत यह हो गई कि 'महाराज' आगे-आगे और पुलिस पीछे-पीछे भागती रही। दौलत और सत्ता के बल पर रौब गालिब करने वाले संतोष महाराज अपनी बचत के लिए पोटली लेकर हर उस दरबार तक दौड़े जहां तक उनकी पहुंच थी लेकिन काम कुछ नहीं आया। अंततः मा.उच्च न्यायालय के आदेश के बाद खाकी की रफ्तार पर ब्रेक लग सकी। फतेहपुर जनपद के 13 विकास खंडों की 816 ग्राम पंचायतों में वैसे तो भ्रष्टाचार की शिकायतें होती ही रहती हैं लेकिन असोथर विकास खंड की सरकंडी उस समय चर्चा में आ गई जब ग्राम प्रधान के भ्रष्टाचार की जांच करने शासन से टीम आ गई।मनरेगा सहित धन के बदले आवास की शिकायतों ने ग्रामीणों को इतना मुखर कर दिया कि उन्होंने संतोष द्विवेदी के खिलाफ मोर्चा ही खोल दिया। विरोधी सुरों को हवा पूर्व ब्लाक प्रमुख सुधीर त्रिपाठी ने दी तो ग्रामीणों के हौसले और बुलंद हो गए।अपनी बचत के रास्ते जब तक संतोष द्विवेदी खोज पाते उससे पहले ही विरोधियों ने ऐसा अचूक दांव चला कि भ्रष्टाचार के मामले में ग्राम प्रधान संतोष द्विवेदी की धर्मपत्नी पुष्पा द्विवेदी को पुलिस राधानगर स्थित घर से तड़के उठा ले गई और जेल भेज दिया।असोथर एवं राधानगर की जिस पुलिस पर महाराज का सिक्का चलता था उसी पुलिस ने उनकी एक नहीं सुनीं इतना ही नहीं ग्राम प्रधान को कपड़े तक बदलने का मौका नहीं दिया।घरेलू कपड़ों में ही उन्हें जाना पड़ा।शायद विरोधियों की यह पहली बड़ी जीत थी जिसमें वह अपनी पीठ थप-थपा रहे थे कि किस तरह से पावर,पैसा,सत्ता होने के बावजूद महाराज के गुरुर को कुचलने में वे कामयाब हो गए।विरोधी खेमां यहीं नहीं रुका।ग्रामीणों से मारपीट के दर्ज मुकदमें में एक सप्ताह में ही पुलिस ने संतोष द्विवेदी को ₹25000 का इनामियां घोषित कर दिया। खाकी की यही जल्दबाजी आगे चलकर उनके सहारे का कारण बनीं। अंदरखाने बड़े खेल की ही तैयारी चल रही थी जिसमें इनामी राशि को बढ़ा कर महाराज को भगोड़ा घोषित करने के साथ-साथ ऑपरेशन लंगड़ा की भेंट भी चढ़ाया जा सकता था। ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि अगर माननीय उच्च न्यायालय से संतोष द्विवेदी को अरेस्ट स्टे ना मिलता तो कुछ बड़ा ही देखने को मिलता। जिस दौलत,ताकत एवं सत्ता के सहारे संतोष द्विवेदी ने अपना रुतबा कायम किया उसी रौब को कुचलने के लिए विरोधी खेमा बेताब दिख रहा था। यह अकेले भ्रष्टाचार का विरोध कर रहे ग्रामीणों के वश की बात नहीं थी। पूर्व ब्लाक प्रमुख का साथ उनके मित्र विधायक ने मजबूती के साथ दिया कई और 'खेल के अंदर फंद के बाहर' रहने वाले राजनैतिक एवं सामाजिक विरोधियों ने मौके का फायदा उठाया।संतोष को मदद का भरोसा देते रहे लेकिन हकीकत में उन्हें धूल धूसरित होता देखना चाह रहे थे। सरकंडी के महाराज की हालत ऐसी हो गई कि वह खुद भी भाजपा के पिछलग्गू रहे और पुत्र भाजयुमों का पदाधिकारी होने के बावजूद अपने वजूद की रक्षा नहीं कर पाए। हर उस दरवाजे पर दस्तक दी जहां से मदद की उम्मीद थी लेकिन पुलिस की सख्ती के चलते स्टे मिलने तक केवल उनकी किस्मत में भागते रहना ही लिखा रहा।मदद को लेकर भारतीय जनता पार्टी के नेता भी दो खेमों में बंट गए। खुलकर विरोध तो किसी ने नहीं किया लेकिन महाराज की पूर्व की करतूतों,उनके अहंकार की चर्चा कर चटकारे लेते रहे। संतोष के मददगार सत्ता के गलियारे तक खूब दौड़े।अधिकारियों से लेकर नेताओं तक हर लॉलीपॉप,संवेदना एवं सपना दिखाया लेकिन काम कुछ भी नहीं आया।सही मायने में असल विरोधी संतोष महाराज की यही बेबसी,बेचैनी व लाचारी को देखना चाह रहे थे। अब भ्रष्टाचार की जांच के साथ-साथ अपने एवं सहयोगियों के ऊपर दर्ज मुकदमें से पार पा कर अपने रुतबे को पुनःकायम करना संतोष द्विवेदी के लिए छोटी चुनौती नहीं है। पूर्व प्रमुख सुधीर त्रिपाठी राजनीति की नई पारी खेलने की तैयारी में है।पर्दे के पीछे से सत्ताधारियों का उन्हें भी साथ मिल रहा है। गुल क्या खिलेगा?ये तो भविष्य के गर्भ में है लेकिन उसके पहले विरोधियों ने जिस तरह से संतोष द्विवेदी के वजूद को खतरे में डालने के लिए चारों तरफ से घेरा है उससे 'महाराज' को अपनों की अदावत भारी पड़ रही है।या यूं कहा जाए की सरकंडी का 'सिंहासन' विरोधियों ने 'हिला' कर रख दिया है।