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Gorakhpur३ दिन पहले

विश्व विख्यात कथावाचक शांतनु जी महाराज के मुखारविंद से प्रवाहित हो रही

विश्व विख्यात कथावाचक शांतनु जी महाराज के मुखारविंद से प्रवाहित हो रही

विश्व विख्यात कथावाचक शांतनु जी महाराज के मुखारविंद से प्रवाहित हो रही श्रीराम कथा, पंचम दिवस पर उमड़ा जनसैलाब बेलघाट, बांसगांव संदेश नगर में आयोजित श्रीराम कथा महोत्सव का पंचम दिवस भक्ति, भाव और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा। यह पावन प्रवचन कार्यक्रम विश्व विख्यात कथावाचक शांतनु जी महाराज के मुखारविंद से निरंतर प्रवाहित हो रहा है। उनके ओजस्वी वाणी, मार्मिक व्याख्या और जीवनोपयोगी संदेशों से श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। यह आयोजन सुमित के अध्यक्ष रणवीर शाही ‘चंचल’ की रूपरेखा एवं मार्गदर्शन में संचालित किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा स्थल पर उपस्थित होकर धर्मलाभ अर्जित कर रहे हैं। पंचम दिवस की कथा का शुभारंभ रामचरितमानस के अयोध्या कांड की मंगलमयी चौपाइयों के सस्वर गान से हुआ। जनकपुर से एक माह पश्चात श्रीराम के अयोध्या आगमन और नगरी में व्याप्त समृद्धि का भावपूर्ण चित्रण करते हुए महाराज श्री ने बताया कि जब शासन धर्म और मर्यादा पर आधारित होता है, तब राज्य में सुख, शांति और वैभव स्वतः स्थापित होते हैं। राजसभा प्रसंग में महाराज दशरथ द्वारा शीशा देखने की घटना को आत्मचिंतन का प्रतीक बताते हुए शांतनु जी महाराज ने कहा कि मनुष्य को समय-समय पर स्वयं का मूल्यांकन करना चाहिए। श्वेत केश देखकर दशरथ द्वारा राज्य श्रीराम को सौंपने का विचार इस बात का संकेत है कि जीवन के उत्तरार्ध में व्यक्ति को सांसारिक मोह से निवृत्त होकर भक्ति और साधना में मन लगाना चाहिए। कथा में देवताओं द्वारा विघ्न रचना तथा सरस्वती द्वारा मंथरा की बुद्धि परिवर्तन का प्रसंग भी विस्तार से सुनाया गया। महाराज श्री ने मंथरा को कुसंग का प्रतीक बताते हुए चेताया कि कुसंग का प्रभाव अत्यंत घातक होता है। इसी प्रभाव में कैकेयी ने वनवास का वरदान माँगा, जिसे सुनकर दशरथ की वेदना असहनीय हो उठी। यह प्रसंग संगति के महत्व और उसके दुष्परिणामों को स्पष्ट करता है। वनगमन से पूर्व प्रभु श्रीराम द्वारा माता कौशल्या से आशीर्वाद ग्रहण करने का वर्णन करते हुए महाराज श्री ने भारतीय मातृशक्ति की महिमा का गुणगान किया। उन्होंने कहा कि माताएँ त्याग, धैर्य और संस्कार की आधारशिला हैं, जो परिवार और समाज को एकसूत्र में बाँधे रखती हैं। भ्रातृ प्रेम के प्रसंग में लक्ष्मण के समर्पण और त्याग को समाज के लिए आदर्श बताया। कथा के इस पावन अवसर पर जनार्दन तिवारी, जिला अध्यक्ष, भारतीय जनता पार्टी की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने कथा श्रवण कर आयोजन की सराहना की और धर्म-संस्कृति के संरक्षण में समाज की सक्रिय भागीदारी पर बल दिया। समापन उपरांत रामभक्तों द्वारा श्रद्धापूर्वक बूंदी एवं केले का प्रसाद वितरण किया गया। इस सेवा कार्य में जवाहर मिश्रा, योगेश मिश्रा, जनार्दन मिश्रा, राहुल मिश्रा, बलवंत मिश्रा, संतोष मिश्रा सहित अनेक श्रद्धालुओं का उल्लेखनीय योगदान रहा। इस अवसर पर जिला अध्यक्ष जनार्दन तिवारी के साथ अखिलेश सिंह, हिरण प्रकाश मिश्रा, देवेंद्र सिंह, शिवेंद्र सिंह, विक्की देवेंद्र सिंह, रामप्रवेश तिवारी, भुवर यादव, तारकेश्वर मिश्रा, बजरंगी सिंह, रंजन शाही, सुशील शाही, दुर्गेश विक्रम, विजेंद्र सिंह, आशीष सिंह, विशाल सिंह और विनोद सिंह सहित भारी संख्या में लोग उपस्थित रहे। विश्व विख्यात कथावाचक शांतनु जी महाराज की प्रभावशाली वाणी, आयोजन समिति के सुव्यवस्थित प्रयास, अध्यक्ष रणवीर शाही ‘चंचल’ का मार्गदर्शन और श्रद्धालुओं की आस्था ने पंचम दिवस को आध्यात्मिक उत्सव का रूप प्रदान कर दिया

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