खिलाड़ी हिमांशु सिंह की जज़्बे भरी कहानी: हार स्कोरबोर्ड पर हुई, हौसलों
खिलाड़ी हिमांशु सिंह की जज़्बे भरी कहानी: हार स्कोरबोर्ड पर हुई, हौसलों में नहीं। सहजनवा गोरखपुर उत्तर प्रदेश वुशु राज्य चैंपियनशिप 2026, दिनांक 25 जून से 28 जून 2026, जो एम.एस. फार्म्स, करनल रोड, शामली में आयोजित की गई, उसमें गोरखपुर के खिलाड़ी हिमांशु सिंह ने जूनियर कैटेगरी के 52 किलोग्राम भार वर्ग में प्रतिभाग किया। प्रतियोगिता के दौरान हिमांशु सिंह को केवल रिंग के अंदर प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी से ही नहीं, बल्कि अपनी शारीरिक चुनौतियों से भी लड़ना पड़ा। यह मुकाबला सिर्फ दो खिलाड़ियों के बीच नहीं था, बल्कि एक खिलाड़ी और उसकी परिस्थितियों के बीच की लड़ाई भी बन गया। एक तरफ जीत की उम्मीद, दूसरी तरफ शरीर की परेशानियां, लेकिन हौसले लगातार आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे। गोरखपुर के फाइटर हिमांशु सिंह ने अपने प्रदर्शन से यह साबित कर दिया कि असली खिलाड़ी वही होता है जो मुश्किल परिस्थितियों में भी आखिरी सांस तक लड़ना नहीं छोड़ता। हिमांशु ने मुकाबले के पहले राउंड में शानदार प्रदर्शन करते हुए जीत दर्ज की। दूसरे राउंड में भी उनका खेल बेहद अच्छा चल रहा था और पॉइंट्स के मामले में भी वे आगे बताए जा रहे थे। लेकिन मैच के दौरान एक ऐसी परेशानी सामने आई जिसने मुकाबले की दिशा बदल दी। हिमांशु पहले से ही आंखों की समस्या से जूझ रहे हैं और उनका चश्मे का नंबर भी काफी ज्यादा है। इसी दौरान अचानक उनकी दृष्टि धुंधली होने लगी, जिससे उन्हें सामने की चीजें साफ दिखाई देना बंद हो गया। इसी बीच पैर के अंगूठे में भी चोट लग गई। जब स्थिति ज्यादा कठिन हो गई तो मुकाबला रोकना पड़ा और नियमों के अनुसार प्रतिद्वंद्वी को विजेता घोषित कर दिया गया। हिमांशु के अनुसार, बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर के डॉ. सोनी चौधरी (असिस्टेंट प्रोफेसर), डॉ. विक्रांत सिंह और उनकी टीम ने उन्हें बताया है कि आंखों की स्थिति के लिए आगे ऑपरेशन की आवश्यकता पड़ सकती है, लेकिन फिलहाल उनकी उम्र 17 वर्ष है। Combat Sports जैसे Wushu में Contact Lens का इस्तेमाल भी चुनौती बन सकता है, क्योंकि चेहरे और आंखों पर चोट लगने की संभावना रहती है। हिमांशु का कहना है कि किसी भी चैंपियनशिप में प्रतिभाग करने के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट की आवश्यकता होती है। बिना मेडिकल फिटनेस के खिलाड़ी प्रतियोगिता में भाग नहीं ले सकता। हिमांशु को आंखों की समस्या उनके खेल के भविष्य पर असर डाल रहा है सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह चुनौती हिमांशु के सपनों को रोक पाएगी? हिमांशु कोई साधारण खिलाड़ी नहीं हैं। वे Combat Sports में 50 से अधिक मेडल जीत चुके हैं और अपने जिले व राज्य के लिए कई उपलब्धियां हासिल कर चुके हैं। “जीत पर कई लोग साथ खड़े होकर फोटो खिंचवाते हैं, लेकिन मुश्किल वक्त में कौन साथ खड़ा होता है — हिम्मत सिंह का कहना है की हार सिर्फ स्कोरबोर्ड पर हुई है, हौसलों में नहीं। जख्म शरीर पर है, हौसलों पर नहीं। वापसी ऐसी होगी कि देखने वाले भी याद रखेंगे।