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Sonbhadraलगभग १ घंटा पहले

जनप्रतिनिधियों की अनदेखी लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत* क्षेत्र के ग्राम प्रधानों में

जनप्रतिनिधियों की अनदेखी लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत* क्षेत्र के ग्राम प्रधानों में

जनप्रतिनिधियों की अनदेखी लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत* क्षेत्र के ग्राम प्रधानों में नाराजगी चोपन (सोनभद्र)। विकास खंड चोपन अंतर्गत ग्राम पंचायत वैरपुर एवं कनहरा के बीच बिजुल नदी पर स्थित नदहरी शंकर जी घाट पर नवनिर्मित पुल का उद्घाटन प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री श्री संजीव कुमार गोंड द्वारा किया गया। क्षेत्रवासियों ने पुल निर्माण को विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए सरकार का आभार व्यक्त किया। हालांकि उद्घाटन कार्यक्रम के बाद दोनों ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधियों ने नाराज़गी जताई। उनका कहना है कि कार्यक्रम उनके ग्राम सभा क्षेत्र में आयोजित होने के बावजूद संबंधित ग्राम प्रधानों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को न तो सूचना दी गई और न ही आमंत्रित किया गया। उनका मानना है कि यह केवल दो ग्राम प्रधानों की उपेक्षा नहीं, बल्कि पूरे ग्राम की जनता द्वारा दिए गए जनादेश की अनदेखी है। प्रधान प्रतिनिधि सुनील भारती (वैरपुर) ने कहा कि ग्राम प्रधान लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण इकाई हैं। विकास कार्यों के संचालन, योजनाओं के क्रियान्वयन और जनसमस्याओं के समाधान में ग्राम पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में उद्घाटन जैसे सार्वजनिक कार्यक्रमों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सहभागिता और सम्मान सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ग्राम प्रधान किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि पूरे गांव की जनता का निर्वाचित प्रतिनिधि होता है। वह "सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय" की भावना के साथ सभी वर्गों के हित में कार्य करने का दायित्व निभाता है। इसलिए जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं मानी जा सकती। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व पर विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की मंशा सभी जनप्रतिनिधियों को साथ लेकर विकास कार्यों को आगे बढ़ाने की है। उन्होंने अपेक्षा जताई कि भविष्य में ऐसे आयोजनों में स्थानीय ग्राम प्रधानों एवं अन्य जनप्रतिनिधियों को उचित सम्मान और सहभागिता प्रदान की जाएगी। अंत में उन्होंने कहा, "लोकतंत्र में सम्मान किसी पद का नहीं, बल्कि जनता के जनादेश का होता है। गांव का सम्मान, जनप्रतिनिधियों का सम्मान और लोकतंत्र का सम्मान—तीनों एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।"

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