*गोरखपुर में प्रतिबंधित चाइनीज मांझे का खूनी खेल जारी* *इलाहीबाग बंधे पर
*गोरखपुर में प्रतिबंधित चाइनीज मांझे का खूनी खेल जारी* *इलाहीबाग बंधे पर गर्दन कटने से युवक की मौत* *पूर्व की घटनाओं से भी नहीं चेता प्रशासन* गोरखपुर। शहर में प्रतिबंधित चाइनीज (सिंथेटिक) मांझे की बिक्री और इस्तेमाल पर रोक लगाने के प्रशासनिक दावे एक बार फिर खोखले साबित हुए हैं। शनिवार को तिवारीपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत इलाहीबाग बंधे पर चाइनीज मांझे की चपेट में आने से सूरजकुंड निवासी 35 वर्षीय रमेश कन्नौजिया की दर्दनाक मौत हो गई। जिला अस्पताल पर रिश्तेदारों ने बताया कि रमेश किराने की दुकान पर काम करते थे। मिली जानकारी के अनुसार, रमेश कन्नौजिया अपनी मोपेड से इलाहीबाग बंधे की तरफ से गुजर रहे थे। तभी अचानक हवा में लटक रहा धारदार चाइनीज मांझा उनकी गर्दन में फंस गया। इससे पहले कि वह संभल पाते, मांझे ने उनकी गर्दन को गहराई से रेत दिया। मौके पर ही अत्यधिक खून बहने लगा और मोपेड अनियंत्रित होकर सड़क किनारे गिर गई। राहगीरों की मदद से आनन-फानन में उन्हें गंभीर हालत में जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद परिजनों में कोहराम मच गया है और क्षेत्र के लोगों में भारी आक्रोश है। *शहर में पहले भी कहर बरपा चुका है कातिल मांझा* गोरखपुर में चाइनीज मांझे से यह कोई पहली अनहोनी नहीं है। इससे पहले भी शहर के विभिन्न इलाकों में कई राहगीर और दोपहिया वाहन चालक इसका शिकार बन चुके हैं। बीते महीनों में राजघाट पुल और डोमिनगढ़ के आसपास बाइक सवार युवक पतंग के प्लास्टिक मांझे की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं, जिनके चेहरे और गले पर दर्जनों टांके लगाने पड़े थे। पैडलेगंज से लगाये विश्वविद्यालय मार्ग, फ्लाईओवरों और खुले मार्गों पर उड़ती पतंगों के मांझे से कई छात्र व राहगीर चोटिल हो चुके हैं। पक्षियों के कटकर मरने की घटनाएं तो आए दिन सामने आती रहती हैं। *छापेमारी सिर्फ कागजों तक सीमित* हर साल मकर संक्रांति और त्योहारी सीजन के आसपास पुलिस-प्रशासन द्वारा चाइनीज मांझा बेचने वालों पर कार्रवाई का दावा किया जाता है, लेकिन कुछ दिनों बाद धड़ल्ले से इसकी अवैध बिक्री फिर शुरू हो जाती है। घटनास्थल पर लोगों का कहना है कि प्रशासन द्वारा केवल प्रतिबंध लगाने के आदेश जारी कर देने से स्थिति नहीं सुधरेगी। जब तक थोक मंडियों, गोदामों और गलियों में चाइनीज मांझा खपाने वाले गिरोहों पर कठोर कानूनी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक सड़कों पर चलते आम लोगों की जिंदगी इसी तरह दांव पर लगती रहेगी।