अमेठी में डीसी ट्रेनिंग भर्ती पर घमासान बीएसए से मांगा गया स्पष्टीकरण,
अमेठी में डीसी ट्रेनिंग भर्ती पर घमासान बीएसए से मांगा गया स्पष्टीकरण, अपात्र फर्म को कार्यादेश देने का आरोप कार्रवाई का इंतजार, अब अयोध्या मंडल से लेकर मुख्यमंत्री तक पहुंचेगी शिकायत अमेठी। जनपद अमेठी में बेसिक शिक्षा विभाग की डीसी ट्रेनिंग भर्ती प्रक्रिया को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। भर्ती में अनियमितता तथा अपात्र फर्म को कार्यादेश दिए जाने के आरोपों के बीच प्रभारी मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) वीरभानु सिंह द्वारा बेसिक शिक्षाधिकारी (बीएसए) संजय तिवारी से स्पष्टीकरण मांगे जाने के बावजूद अब तक किसी ठोस प्रशासनिक कार्रवाई के सामने न आने से शिकायतकर्ताओं और स्थानीय आवेदकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई मामले में दिल्ली की एक फर्म की संचालक प्रिया द्वारा पूर्व में जिलाधिकारी समेत अन्य अधिकारियों एवं सीडीओ को विस्तृत शिकायत सौंपकर भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था। शिकायत में कहा गया कि डीसी ट्रेनिंग भर्ती की निविदा प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी करते हुए कथित रूप से कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर एक अपात्र फर्म को कार्यादेश जारी किया गया। शिकायतकर्ता के अनुसार निविदा शर्तों पर सक्षम समिति के हस्ताक्षर नहीं थे, जो सामान्य वित्तीय नियमावली का उल्लंघन माना जा रहा है। शिकायत दिए जाने के बाद भी अब तक किसी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई न होने से सवाल खड़े हो रहे हैं। तकनीकी मूल्यांकन प्रक्रिया पर उठे सवाल आरोप है कि तकनीकी मूल्यांकन के दौरान सभी आवेदक फर्मों को अयोग्य घोषित कर दिया गया था, लेकिन बाद में कुछ फर्मों को अचानक वित्तीय बिड के लिए योग्य घोषित कर दिया गया। इसी प्रक्रिया के बीच डेकोर इंडिया मल्टी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को कार्यादेश जारी किए जाने को लेकर पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न उठाए जा रहे हैं। अनुभव और दस्तावेजों में विसंगति का आरोप शिकायत में यह भी कहा गया है कि चयनित फर्म निविदा की अनिवार्य अर्हताओं को पूरा नहीं करती। फर्म का जीएसटी पंजीकरण 27 जुलाई 2023 का बताया गया है, जबकि निविदा में न्यूनतम तीन वर्ष का अनुभव अनिवार्य था। इसके अतिरिक्त ब्लैकलिस्टिंग संबंधी शपथ-पत्र कथित रूप से किसी अन्य व्यक्ति के नाम से खरीदे गए स्टांप पेपर पर प्रस्तुत किए जाने तथा टर्नओवर प्रमाणपत्र में पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों से भिन्नता होने के आरोप भी लगाए गए हैं। स्थानीय आवेदकों ने भी उठाई जांच की मांग जामों क्षेत्र के पूरे बाल गोविंद तिवारी मजरे दखिनवारा निवासी दुर्गेश तिवारी ने भी भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए जिलाधिकारी से निष्पक्ष जांच कर चयन प्रक्रिया निरस्त करने की मांग की है। उनका कहना है कि आउटसोर्सिंग कंपनी के माध्यम से भर्ती का विज्ञापन जारी किया गया था, लेकिन चयन प्रक्रिया पूरी तरह स्पष्ट और पारदर्शी नहीं रही। *बीएसए ने आरोपों को बताया निराधार* *बेसिक शिक्षाधिकारी संजय तिवारी ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि शिकायत करने वाले पक्ष को अपना पक्ष रखने के लिए समय दिया गया था, लेकिन वे उपस्थित नहीं हुए। उनके अनुसार गठित समिति की निगरानी में पूरी भर्ती प्रक्रिया नियमों के अनुरूप संपन्न हुई है।* *विभागीय सूत्रों का दावा जांच हुई तो सामने आएगी सच्चाई,* विभाग के एक अधिकारी ने नाम गोपनीय रखने की शर्त पर बताया कि भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कि यदि शासन स्तर से निष्पक्ष जांच कराई जाए तो पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। अब अयोध्या मंडल और मुख्यमंत्री से होगी शिकायत शिकायतकर्ताओं का कहना है कि स्थानीय स्तर पर कार्रवाई न होने के कारण अब इस मामले की शिकायत अयोध्या मंडल के अधिकारियों से की जाएगी। साथ ही पूरे प्रकरण को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक भी पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। उनका आरोप है कि उच्च स्तर की जांच के बिना भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर उठ रहे सवाल समाप्त नहीं होंगे। फिलहाल बीएसए से मांगे गए स्पष्टीकरण के बाद प्रशासन की अगली कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुरूप हुई या लगाए गए आरोपों में सच्चाई है।