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Krishna Prakash Pandey
Gorakhpurलगभग १ घंटा पहले

सुदामा जैसी निस्वार्थ भक्ति से मिलती है अनायास कृपा - राघव ऋषि

सुदामा जैसी निस्वार्थ भक्ति से मिलती है अनायास कृपा - राघव ऋषि

घघसरा गोरखपुर । नगर पंचायत घघसरा मेन मार्केट स्थित राधा कृष्ण मैरेज वाटिका में स्वर्गीय नेबूलाल जी की पुण्यस्मृति में अग्रहरि परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के सप्तम दिवस भक्ति और भाव का अद्भुत संगम देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त कथावाचक पूज्य राघव ऋषि जी ने सुदामा चरित्र का मार्मिक वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति, साधना और जीवन के गूढ़ रहस्यों से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि मनुष्य सुख तो चाहता है, लेकिन उसके लिए सही दिशा में प्रयास नहीं करता। बिना परिश्रम के फल की इच्छा रखना ही जीवन की सबसे बड़ी विडंबना है। मनुष्य पाप करता है, पर उसके परिणाम से बचना चाहता है, जबकि पुण्य किए बिना पुण्य फल की अपेक्षा करता है। यही कारण है कि जीवन में संतुलन और शांति नहीं बन पाती। सुदामा प्रसंग का उल्लेख करते हुए ऋषि जी ने बताया कि सुदामा केवल एक पात्र नहीं, बल्कि हर जीव का प्रतीक हैं, जो रिश्तों की डोर में बंधा हुआ है। माता, पिता, पत्नी, पुत्र जैसे संबंध जीवन को बांधते हैं, लेकिन सच्ची मुक्ति तब मिलती है जब मनुष्य इन सबके बीच रहकर भी भगवान से जुड़ा रहता है। उन्होंने कहा कि “जो भगवान को नहीं देता, वही वास्तव में गरीब है।” सुदामा और उनकी पत्नी सुशीला के जीवन का उदाहरण देते हुए उन्होंने गृहस्थ जीवन की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जब पति-पत्नी मिलकर भक्ति और सेवा में लगते हैं, तो वह गृहस्थ आश्रम संन्यास से भी श्रेष्ठ बन जाता है। भगवान बाहरी आडंबर नहीं, बल्कि निर्मल हृदय देखते हैं। कथा के दौरान सुदामा के द्वारिका पहुंचने और भगवान द्वारा उनके चरण धोने का प्रसंग सुनकर श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। ऋषि जी ने बताया कि भगवान अपने भक्त के प्रेम के आगे स्वयं को भी छोटा कर लेते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जीव भगवान की ओर दो कदम बढ़ाता है, तो भगवान सौ कदम आगे बढ़कर उसकी सहायता करते हैं। इस दौरान सौरभ ऋषि द्वारा गाया गया भजन “अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो” श्रद्धालुओं को भावविभोर कर गया। पूरा पंडाल भक्ति रस में डूब गया। आगे उन्होंने कहा कि परमात्मा ही जीव के सच्चे और निस्वार्थ मित्र हैं। निष्काम कर्म ही पापों को नष्ट करता है और सच्ची भक्ति ही मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है। उन्होंने परीक्षित और शुकदेव प्रसंग के माध्यम से गुरु की महत्ता पर भी प्रकाश डाला। कार्यक्रम में पोथी पूजन एवं व्यास पूजन मुख्य यजमान श्रीमती सुभावती देवी ने सपरिवार संपन्न कराया। आरती में अशोक अग्रहरि, रविन्द्र अग्रहरि (प्रधान), अरविंद अग्रहरि सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। संयोजक अशोक अग्रहरि ने बताया कि आगामी कार्यक्रम में प्रातः 9 बजे पूर्णाहुति होगी, इसके बाद दोपहर 1 से 3 बजे तक विशेष प्रवचन और फिर विशाल भंडारे के साथ कथा का समापन किया जाएगा। साथ ही प्रतिदिन प्रातः 7:30 बजे से पूज्य ऋषि जी द्वारा निःशुल्क ज्योतिषीय परामर्श भी दिया जा रहा है। पूरे आयोजन में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही और वातावरण पूरी तरह भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा।

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