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Gorakhpur४ मिनट पहले

धैर्य और धर्म की परीक्षा नहीं लेनी चाहिए पं सूरज कृष्ण शास्त्री

धैर्य और धर्म की परीक्षा नहीं लेनी चाहिए पं सूरज कृष्ण शास्त्री

चौरी चौरा । धैर्य और धर्म की परीक्षा नहीं लेनी चाहिए़ जंगल रसूलपुर दूबे टोला में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में प्रसंग में पंडित सूरज कृष्ण शास्त्री ने कहीं उन्होंने कथा प्रसंग में कहा कि अनुसूया माता अत्री मुनि की पत्नी थी पति को ईश्वर मानकर वह पति की सेवा करती थी एक बार महाकाली महालक्ष्मी महा सरस्वती को अहंकार हो गया तो उन्होंने ब्रह्मा विष्णु और भोलेनाथ को मां अनुसूया की पतिव्रत धर्म की परीक्षा लेने को कहा ब्रह्मा विष्णु और भोलेनाथ मां अनुसूया के घर पहुंचे और बोले आप हमें भोजन नग्न होकर परोसेंगे । उन्होंने अपने पति परमेश्वर का ध्यान किया तो उन्हें पता चल गया ये तीनों अतिथि कोई और नहीं बल्कि ब्रह्मा बिष्णु और महेश हैं एक तरफ अतिथि को भोजन कराना और दूसरी तरफ पतिव्रता धर्म का पालन करना है तो उन्होंने देवों को बालक बना कर भोजन परोसा इस तरह पतिव्रत धर्म और आतिथ्य धर्म का पालन किया। इस तरह माता अनुसूया ने तीनों देवियों के अहंकार को भी नष्ट किया। इस अवसर पर यजमान विद्यासागर दुबे कौशल्या देवी अमित दूबे सुमित दूबे गिरीश दुबे विमल दूबे संजीव बाजपेई धीरज द्विवेदी अभिषेक रंजन द्विवेदी सुनील उपाध्याय सुशीला उपाध्याय राजेश पांडेय मनोज मिश्रा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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