54वें स्थापना दिवस पर गूंजा हिन्दी का गौरव, प्राचार्य ने महाविद्यालय की

54वें स्थापना दिवस पर गूंजा हिन्दी का गौरव, प्राचार्य ने महाविद्यालय की गरिमा पुनर्स्थापित करने का लिया संकल्प भुड़कुड़ा (गाजीपुर)।श्री महंथ रामाश्रयदास स्नातकोत्तर महाविद्यालय, भुड़कुड़ा में 54वां स्थापना दिवस एवं हिन्दी दिवस समारोहपूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय परिसर स्थित रामकरन सिंह रंगशाला में किया गया। इस अवसर पर छात्र-छात्राओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से हिन्दी भाषा के प्रति सम्मान और अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय की छात्राओं मनीषा यादव, वंदना गौंड, अदिति, निशा यादव तथा शालू यादव द्वारा सरस्वती वंदना एवं कुलगीत की प्रस्तुति से हुआ। इसके पश्चात वक्ताओं ने विद्यार्थियों के साथ मातृभाषा हिन्दी में संवाद करते हुए उनके भीतर आत्मविश्वास का संचार करने का प्रयास किया। वक्ताओं ने कहा कि हिन्दी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, संवेदना और विचारों की अभिव्यक्ति का सशक्त आधार है।इस अवसर पर प्राचार्य प्रो. रमेश कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि यह महाविद्यालय संतों की तपोभूमि पर मठ द्वारा स्थापित किया गया है। इसके संस्थापक प्राचार्य डॉ. इन्द्रदेव के दूरदर्शी नेतृत्व में उन्हें अपने अध्यापकीय जीवन को प्रारंभ करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि आज जिस उम्मीद और भरोसे के साथ उन्हें प्राचार्य के रूप में कार्य करने का दायित्व मिला है, उसके अनुरूप महाविद्यालय की गरिमा को अक्षुण्ण रखते हुए कार्य करने के लिए वे संकल्पित हैं।प्राचार्य ने कहा कि विद्यार्थियों की घटती संख्या वर्तमान में महाविद्यालय के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। इस चुनौती से निपटने के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर गांवों में प्रवास कर विद्यार्थियों और अभिभावकों से संवाद स्थापित करने का प्रयास भी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की समस्याओं का समाधान महाविद्यालय की सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी कारणवश विद्यार्थियों का परीक्षा परिणाम बाधित हुआ है, तो विश्वविद्यालय स्तर पर उसका त्वरित निस्तारण कराने का प्रयास किया जाएगा, ताकि किसी भी विद्यार्थी का भविष्य प्रभावित न हो। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय की समृद्ध परंपरा पर सभी को गर्व है और नई पीढ़ी के विद्वान शिक्षकों तथा क्षेत्रवासियों के सहयोग से महाविद्यालय के गौरव को पुनर्स्थापित करने में सफलता मिलेगी।प्राचार्य ने कहा कि ग्रामीण परिवेश में यह महाविद्यालय लंबे समय से उच्च शिक्षा के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी भूमिका निभा रहा है। स्थापना दिवस जैसे आयोजन विद्यार्थियों को महाविद्यालय की ऐतिहासिक विरासत, संस्कारों और शैक्षिक दायित्वों से जोड़ने का कार्य करते हैं।कार्यक्रम के अंत में उपस्थित शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने महाविद्यालय की शैक्षिक उन्नति, विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान तथा उसकी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्धता व्यक्त की। इस अवसर पर महाविद्यालय के सभी शिक्षकगण एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।