*समय के विपरीत चलती खदानें दे रहीं बड़े हादसे को दावत, प्रशासन

*समय के विपरीत चलती खदानें दे रहीं बड़े हादसे को दावत, प्रशासन मौन* सोनभद्र। जनपद के डाला चौकी क्षेत्र अंतर्गत संचालित कई खदानों में नियम-कानूनों को ताक पर रखकर कार्य किए जाने का मामला लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। आरोप है कि निर्धारित समय सीमा के विपरीत खदानों में भारी मशीनों और ओवरलोड वाहनों का संचालन धड़ल्ले से जारी है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों का कहना है कि प्रशासनिक निर्देशों के बावजूद खदान संचालक मनमानी पर उतारू हैं और जिम्मेदार विभाग सब कुछ जानकर भी अनजान बने हुए हैं। क्षेत्रवासियों के अनुसार देर रात तक चलने वाले डंपर और हाइवा वाहन मुख्य सड़कों पर तेज रफ्तार से दौड़ते दिखाई देते हैं। कई बार इन वाहनों के कारण सड़क दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद न तो गति पर नियंत्रण लगाया जा रहा है और न ही ओवरलोडिंग पर प्रभावी कार्रवाई हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि रात के अंधेरे में बिना सुरक्षा मानकों के खनन कार्य किया जाना सीधे तौर पर लोगों की जान से खिलवाड़ है। बताया जा रहा है कि खदान क्षेत्रों के आसपास बसे गांवों में धूल और कंपन से लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है। दिन-रात चलने वाली मशीनों की आवाज से लोगों की नींद हराम हो चुकी है। स्कूल जाने वाले बच्चों और बुजुर्गों को सड़क पार करने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं कई स्थानों पर सड़कें भी भारी वाहनों के दबाव से जर्जर हो चुकी हैं। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि कई खदानों में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा। खदानों के आसपास चेतावनी बोर्ड, सुरक्षा बैरिकेडिंग और प्रकाश व्यवस्था तक नहीं है। ऐसे में यदि कोई बड़ा हादसा हो जाए तो उसकी पूरी जिम्मेदारी किसकी होगी, यह बड़ा सवाल बना हुआ है। क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि समय के विपरीत संचालित खदानों की तत्काल जांच कराई जाए और नियमों का उल्लंघन करने वाले खदान संचालकों पर सख्त कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो डाला क्षेत्र किसी बड़े हादसे का गवाह बन सकता है। वहीं सूत्रों की मानें तो कई बार शिकायतें किए जाने के बावजूद कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रह जाती है। ऐसे में आम जनता के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर नियमों की अनदेखी करने वालों पर कार्रवाई कब होगी। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे को कितनी गंभीरता से लेता है या फिर हादसे के बाद ही जिम्मेदारों की नींद खुलेगी।