*अजमल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग की मांग

*अजमल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग की मांग उठाई* *एसआईआर के बहाने मतदाताओं को निशाना बनाने का आरोप, भूमिका की गहन जांच की मांग* गोरखपुर। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक प्रत्याशी एडवोकेट हिफजुर्रहमान अजमल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग चलाने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के नाम पर बड़ी संख्या में मतदाताओं को निशाना बनाया गया और मतदाता सूची से नाम हटाए गए, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। अजमल ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यकाल और एसआईआर से जुड़ी पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष एवं गहन जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में भारतीय जनता पार्टी की भूमिका की भी जांच के दायरे में आना चाहिए। उनके मुताबिक, चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की निष्पक्षता पर सवाल उठना लोकतंत्र के लिए गंभीर विषय है और जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार ने फरवरी 2025 में देश के 26वें मुख्य निर्वाचन आयुक्त के रूप में पदभार संभाला था। इससे पहले वह 1988 बैच के केरल कैडर के आईएएस अधिकारी रहे तथा केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय में सचिव की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। अजमल ने उनके प्रशासनिक कार्यकाल से जुड़े निर्णयों और महत्वपूर्ण संवैधानिक एवं नीतिगत मामलों में उनकी भूमिका की भी जांच की मांग की। अजमल ने कहा कि चुनाव आयोग में जनता का विश्वास सर्वोपरि है। किसी भी निर्णय अथवा प्रक्रिया पर उठे सवालों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराकर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए, ताकि लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति लोगों का भरोसा कायम रहे। उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकार रितिका चोपड़ा की हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि रिपोर्ट के अनुसार चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के फैसलों एवं प्रक्रियाओं को लेकर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट में मतदाता जोड़ने-हटाने, फॉर्म-6 में बदलाव तथा मतदाता डेटा के केंद्रीकरण जैसे मुद्दों पर दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का उल्लेख किया गया है। अजमल ने कहा कि इन तमाम सवालों की निष्पक्ष जांच कराकर तथ्यों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनी रहे।