New Rajesh Hietec Hospital ‘डॉक्टर भगवान का रूप’, लेकिन लापरवाही ने छीनी

New Rajesh Hietec Hospital ‘डॉक्टर भगवान का रूप’, लेकिन लापरवाही ने छीनी रोशनी; पीड़ितों की कड़ी कार्रवाई की मांग गोरखपुर, सिकरीगंज। सिकरीगंज बांसगांव संदेश समाज में डॉक्टर को भगवान का दूसरा रूप माना जाता है—वह जो जीवन बचाता है, दर्द हरता है और अंधकार में भी उम्मीद की किरण जगाता है। लेकिन सिकरीगंज स्थित न्यू राजेश हाईटेक हॉस्पिटल में हुए मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद सामने आई घटना ने कई परिवारों की दुनिया ही अंधेरी कर दी। पीड़ितों का कहना है, “अगर आंख नहीं तो दुनिया में कुछ भी नहीं।” एक शिविर, कई ज़िंदगियां प्रभावित अस्पताल में आयोजित विशेष सर्जरी शिविर में करीब 30 मरीजों का मोतियाबिंद ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के 24 घंटे के भीतर कई मरीजों को आंखों में तेज दर्द, सूजन और धुंधलापन महसूस हुआ। जांच में कम से कम 18 मरीजों में गंभीर संक्रमण की पुष्टि हुई। संक्रमण के कारण नौ मरीजों की आंखों की रोशनी चली गई, जबकि कुछ को संक्रमण रोकने के लिए आंख निकालनी पड़ी। जिन आंखों से वे अपने बच्चों का चेहरा, अपने घर का आंगन और रोज़ी-रोटी का सहारा देखते थे, वही रोशनी अब उनसे छिन चुकी है। पीड़ित परिवारों का आरोपहै की सही मानकों का पालन नहीं किया गया। उनका कहना है कि लापरवाही ने उनकी जिंदगी अंधकारमय कर दी। एक परिजन ने कहा, “डॉक्टर पर भरोसा करके आए थे, लेकिन हमारी खुशियां छीन ली गईं।” कई मरीजों को हालत बिगड़ने पर लखनऊ, वाराणसी और दिल्ली के बड़े अस्पतालों में रेफर किया गया है। कुछ अब भी उपचाराधीन हैं। प्रशासनिक जांच और कार्रवाई घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल के नेत्र विभाग को सील कर दिया है। मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए गए हैं और अस्पताल के लाइसेंस की समीक्षा की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जिम्मेदार चिकित्सकों और प्रबंधन की भूमिका की जांच की जा रही है। दोष सिद्ध होने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की बात कही जा रही है। सभी प्रभावित मरीजों और उनके परिवारों ने एक स्वर में कहा है कि दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में किसी और को ऐसी पीड़ा न झेलनी पड़े। साथ ही, उन्होंने समुचित मुआवजा और पुनर्वास की मांग भी उठाई है।