शिव-पार्वती विवाह प्रसंग से नेवास गांव में उमड़ा जनसैलाब, भक्ति और उल्लास से गूंजा कथा पंडाल

घघसरा गोरखपुर। नेवास गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन शिव-पार्वती विवाह का दिव्य प्रसंग सुनते ही पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। कथा व्यास प्रशांत भूषण जी महाराज ने अत्यंत ओजपूर्ण और भावपूर्ण शैली में माता पार्वती की कठोर तपस्या, अटूट श्रद्धा और भगवान शिव के प्रति उनके समर्पण का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि माता पार्वती ने वर्षों तक कठिन साधना कर भगवान शिव को प्रसन्न किया और अंततः भोलेनाथ ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। यह प्रसंग त्याग, प्रेम, विश्वास और अटूट भक्ति का अनुपम उदाहरण है। जैसे ही विवाह प्रसंग का वर्णन आगे बढ़ा, कथा पंडाल “हर-हर महादेव” और “जय माता पार्वती” के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। श्रद्धालु भाव-विभोर होकर कथा का रसपान करते रहे। कई भक्तों की आंखें नम हो गईं और वे भक्ति में लीन दिखाई दिए। कथा स्थल पर भगवान शिव और माता पार्वती की सजीव एवं आकर्षक झांकी सजाई गई थी, जिसने सभी का मन मोह लिया। पुष्प वर्षा और मंगल गीतों के साथ वातावरण पूरी तरह शिवमय हो गया। इस अवसर पर जनार्दन त्रिपाठी, नित्यानंद त्रिपाठी, रुदल साहनी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण श्रद्धालु उपस्थित रहे। आयोजन स्थल पर अनुशासन और व्यवस्था सराहनीय रही। पूरा नेवास गांव श्रद्धा, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित नजर आया।