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Krishna Prakash Pandey
Gorakhpur२० मिनट पहले

भगवान बिम्ब और जीव प्रतिबिम्ब - राघव ऋषि

भगवान बिम्ब और जीव प्रतिबिम्ब - राघव ऋषि

घघसरा गोरखपुर। नगर पंचायत घघसरा मेन मार्केट स्थित राधा कृष्ण मैरेज वाटिका में स्वर्गीय नेबूलाल जी की पुण्यस्मृति में अग्रहरि परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पूज्य राघव ऋषि जी ने जडभरत के प्रसंग का समापन करते हुए कहा कि समग्र सृष्टि भगवान श्रीहरि की है। सृष्टि का नियंत्रण करने के लिए मृत्युलोक में भगवान ने अपने सात प्रत्यक्ष ग्रहरूपी पार्षदों को नियुक्त किया है जो प्रतिक्षण मनुष्य को संचालित करते हैं। सूर्य आत्मतत्व, चंद्रमा मन, मंगल सत्व, रजस व तमस तत्व, बुध वाणी, बृहस्पति प्रज्ञा व ज्ञान, शुक्र सुख व भौतिक संसाधन, शनि मनुष्य के सुख व दुख को नियंत्रित करता है। विज्ञान कहता है कि इस धरती पर 70% पानी है एवं मनुष्य के शरीर में 70% पानी है प्रत्येक पूर्णिमा पर जब पृथ्वी के सबसे नजदीक चन्द्रमा रहता है तब समुद्र में ज्वार, भाटे आते हैं तो क्या मनुष्य आन्दोलित नहीं होगा? यदि धर्म की मर्यादा में रहकर जीव जीवन यापन करता है तो उसे सुख व अन्त में मुक्ति प्राप्त होती है। कथाक्रम को आगे बढ़ाते हुए पूज्य ऋषि जी ने कहा कि मन का विश्वास मत करो। मन बड़ा विश्वासघाती है उसे अंकुश में रखो। अजामिल प्रसंग की चर्चा करते हुए बताया कि अजा का अर्थ है माया और माया में फंसा हुआ जीव ही अजामिल है अजामिल ने एक दिन वैश्या को देखा उसका मन बिगड़ गया। आंखें शुद्ध रखो क्योंकि पाप प्रथम आंख से प्रविष्ट होता है। आंख बिगड़ी तो मन बिगड़ा, मन बिगड़ा तो जीवन और नाम भी बिगड़ जाएगा। मनुष्य शरीर की अपेक्षा मन से पाप करता है। अजामिल ने उस वैश्या को अपने घर में रख लिया। संतों के कहने से अपने पुत्र का नाम नारायण रखा अन्त समय में यमदूतों को देखकर भय से अपने पुत्र नारायण को बुलाया। उसका नारायण तो नहीं किन्तु वहां भगवान के दूत आ पहुंचे और दूतों से कहा अजामिल को छोड़ दो। यमदूतों ने कहा कि अजामिल ने नारायण नारायण तो कहा है किन्तु वैकुंठवासी नारायण को नहीं अपने पुत्र को पुकारा है। पार्षदों ने कहा उसके मुख से भगवान का नाम अनजाने ही निकला है। अग्नि में अनजाने में भी पैर पड़ जाए तो भी जलन होती है। इसी प्रकार जाने या अनजाने में भी प्रभु का नाम लिया जाए तो कल्याण होता है। पूज्य ऋषिजी के एकमात्र सुपुत्र सौरभ ऋषि ने "सब हो जाए भव से पार लेकर नाम तेरा" भजन गाया तो बहुत से लोग विभोर होकर भावनृत्य करने लगे। कथाक्रम को आगे बढ़ाते हुए पूज्यश्री ने कहा कि अपने इष्ट देवता, मंत्र, गुरु में पूर्ण निष्ठा रखो क्योंकि ये तीनों तत्व एक हैं का स्मरण करने पर अन्य दो का स्मरण अपने आप हो जाता है। पुत्र चार प्रकार के होते हैं, शत्रु पुत्र, ऋणानुबंधी, उदासीन, सेवक पुत्र। प्रथम तीन पुत्रों से कल्याण नहीं होता, सेवक पुत्र ही स्वयं व अपने जीवन को धन्य करता है। हिरण्यकश्यप अहंकारी था उसने मृत्यु पर विजय पाने के उद्देश्य से वर मांगा। भक्तराज प्रहलाद बालपन से ही भगवदभक्ति करते थे उन्होंने उपदेश देते हुए कहा कि भगवान की भक्ति नौ प्रकार की है: श्रवण, कीर्तन, स्मरण, चरणसेवा, अर्चना, वंदन, दास्य, सख्य और आत्मनिवेदन। नवधा भक्ति से प्रभु प्रसन्न होते हैं। प्रभु की प्रसन्नता से जीवन सफल होता है। अन्त में काष्ठ स्तम्भ चीरकर नृसिंह भगवान प्रकट होते हैं और हिरण्यकश्यप का वध करते हैं। जो मेरा मेरा करता है भगवान उसे मारते हैं जो तेरा तेरा कहता है भगवान तारते हैं। मरना या तरना जीव के अपने हांथ में है। हिरण्यकश्यप अहंकारी था अहंकार घर बाहर अस्त्र, शस्त्र, दिन, रात, घर, आकाश किसी से नहीं मरता उसे भगवान ही मारते हैं। वर्णाश्रम व्यवस्था पर चर्चा करते हुए पूज्य श्री ने कहा कि आज के समय की दृष्टि से 23 वर्ष तक ब्रह्मचर्य, 40 वर्ष तक गृहस्थ, 50 वर्ष तक वानप्रस्थ उसके बाद सन्यास आश्रम में प्रवेश करना चाहिए। ब्रह्मचर्य वृद्धि है, गृहस्थ क्षय है, वानप्रस्थ संयम बढ़ाकर शक्ति अर्जन या गुणाकार करना संन्यास भागा कार है। वर्णाश्रम की रचना क्रमशः धीरे धीरे जीव को ईश्वर के निकट ले जाने का सोपान है। गणमान्यों में सहजनवां के विधायक प्रदीप शुक्ल, नगर पंचायत अध्यक्ष प्रभाकर दूबे, भाजपा नेता कृष्णमोहन कसौधन की उपस्थिति रही। पोथीपूजन एवं व्यासपूजन मुख्य यजमान सुभावती देवी द्वारा सपरिवार सम्पन्न किया गया। सर्वश्री अशोक अग्रहरि, रविन्द्र अग्रहरि, अरविंद अग्रहरि, पन्नेलाल, रामशब्द, रामजीत, नन्दन अग्रहरि, राजेश त्रिपाठी, राकेश दूबे, सुधाकर पाण्डेय, राजन मिश्र, अरविंद तिवारी, आद्याराम मिश्र, गौतम यादव आदि भक्त श्रद्धालुओं ने आरती की। प्रातः 7:30 से वाटिका में बनी ऋषि कुटिया में जन्मपत्रिका के माध्यम से निःशुल्क ज्योतिषीय परामर्श पूज्य ऋषिजी द्वारा प्रदान किया गया। समिति संयोजक अशोक अग्रहरि ने बताया कि सोमवार की कथा में वामन अवतार, श्रीराम चरित्र एवं श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की उत्साहपूर्ण लीला रहेगी जिसमें प्रांगण के श्रृंगार आदि की व्यवस्था क्षेत्रवासियों द्वारा करायी जा रही।

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