गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक MLC चुनाव: डॉ. संजयन त्रिपाठी कल सपा प्रत्याशी के रूप

गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक MLC चुनाव: डॉ. संजयन त्रिपाठी कल सपा प्रत्याशी के रूप में करेंगे नामांकन गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी डॉ. संजयन त्रिपाठी मंगलवार को सपा के अधिकृत प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल करेंगे। सोमवार को बेतियाहाता स्थित अपने आवास पर प्रेस वार्ता में डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि उन्होंने 1 अक्टूबर को निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन किया था, लेकिन अब समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण करने के बाद उन्हें पार्टी का अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया गया है। उन्होंने कहा कि सपा प्रत्याशी बनने के बाद 17 जिलों में पार्टी संगठन की पूरी ताकत उनके साथ है। निर्दलीय के रूप में जो तैयारियां अधूरी थीं, उन्हें सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पूरा करने का काम किया है। *भाजपा के कार्यक्रम पर उठाए सवाल* भाजपा प्रत्याशी के नामांकन कार्यक्रम में शिक्षक नेताओं की अनुपस्थिति पर पूछे गए सवाल पर डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि शिक्षक संगठनों को राजनीतिक दलों से संबद्ध होने के नुकसान पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संगठन के संस्थापक स्व. ओम प्रकाश शर्मा ने जीवन भर किसी राजनीतिक दल से नाता नहीं रखा, क्योंकि उनका मानना था कि राजनीति से जुड़ने पर संगठन का महत्व कम हो जाता है। आज मंच पर भाजपा के विधायक, सांसद और मंत्री दिखे, लेकिन शिक्षक नेता नहीं दिखे। यह आने वाले समय में शिक्षकों के साथ क्या होने वाला है, उसकी बानगी है। *पुरानी पेंशन को बताया सबसे बड़ा मुद्दा* पुरानी पेंशन बहाली पर डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि यह शिक्षकों का सबसे गंभीर मुद्दा है और इसका समाधान केवल सत्ता के पास है। उन्होंने कहा कि अगर सत्ताधारी दल का प्रत्याशी पुरानी पेंशन बहाली की घोषणा कर दे तो शिक्षक उसका समर्थन कर सकते हैं। दूसरा विकल्प समाजवादी पार्टी है, जिसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि सपा सरकार बनने पर पुरानी पेंशन बहाल की जाएगी। डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि प्रत्याशी घोषित होने से पहले उन्होंने सपा नेतृत्व के सामने पुरानी पेंशन बहाली और वित्तविहीन शिक्षकों के सम्मानजनक मानदेय की मांग रखी थी। उन्होंने कहा कि सरकारें कई योजनाओं पर खर्च करती हैं, शिक्षकों को पुरानी पेंशन मिलने से उनका मनोबल बढ़ेगा और वे प्रदेश के विकास में बेहतर योगदान देंगे। उन्होंने दावा किया कि शिक्षक-कर्मचारी हितों में अधिकांश बड़े फैसले पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल में हुए हैं। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे अपने हितों को देखते हुए सोच-समझकर निर्णय लें।