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सावन के अंतिम सोमवार पर सरस्वती शिशु मन्दिर कादीपुर के नन्हे-मुन्ने भैया-बहनों

सावन के अंतिम सोमवार पर सरस्वती शिशु मन्दिर कादीपुर के नन्हे-मुन्ने भैया-बहनों

सावन के अंतिम सोमवार पर सरस्वती शिशु मन्दिर कादीपुर के नन्हे-मुन्ने भैया-बहनों ने निकाली भव्य कांवड़ यात्रा कादीपुर। सावन के पावन अंतिम सोमवार के अवसर पर सरस्वती शिशु मन्दिर झारखण्ड कादीपुर, सुलतानपुर के नन्हे-मुन्ने भैया-बहनों द्वारा भव्य एवं भक्तिमय कांवड़ यात्रा निकाली गई। भगवा परिधान, कांवड़ और भगवान शिव के जयघोष से पूरा नगर शिवमय हो उठा। कांवड़ यात्रा का शुभारंभ विद्यालय परिसर से हुआ। भैया-बहन उत्साहपूर्वक कांवड़ लेकर नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए पुरानी बाजार स्थित प्रसिद्ध शिवालय पहुँचे, जहाँ श्रद्धापूर्वक जलाभिषेक किया। इसके पश्चात राम-जानकी मंदिर में दर्शन-पूजन कर सभी ने भगवान श्रीराम एवं माता जानकी का आशीर्वाद प्राप्त किया। यात्रा नगर के विभिन्न मार्गों से होते हुए झारखण्ड महादेव मंदिर पहुँची, जहाँ भैया-बहनों ने भगवान भोलेनाथ के दर्शन कर जल अर्पित किया। पूजा-अर्चना एवं जयघोष के पश्चात कांवड़ यात्रा पुनः विद्यालय परिसर में आकर संपन्न हुई। विद्यालय के प्रधानाचार्य अशोक उपाध्याय ने भैया-बहनों को भगवान भोलेनाथ की महिमा बताते हुए कहा कि भगवान शिव करुणा, दया, त्याग और सरलता के प्रतीक हैं। हमें उनके जीवन से प्रेरणा लेकर अपने जीवन में सेवा, संयम, सदाचार, परोपकार और संस्कारों को अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन बच्चों में अपनी भारतीय संस्कृति, परंपरा और आध्यात्मिक मूल्यों के प्रति श्रद्धा एवं गौरव की भावना विकसित करते हैं। पूरी यात्रा के दौरान विद्यालय के आचार्य श्री राम गणेश मिश्रा, प्रेम नारायण, दुर्गेश पाण्डेय, आदित्य अग्रहरि तथा आचार्या श्रीमती लक्ष्मी शर्मा एवं अंशिता त्रिपाठी सहित सभी आचार्य-आचार्याओं ने भैया-बहनों के साथ रहकर यात्रा को व्यवस्थित एवं सुरक्षित बनाने में सहयोग किया। कांवड़ यात्रा में समाज के अनेक बंधुओं ने भी सहभागिता कर नन्हे-मुन्ने भैया-बहनों का उत्साहवर्धन किया। विद्यालय प्रबंध समिति के पदाधिकारी एवं सदस्यों ने भी यात्रा में उपस्थित होकर बच्चों का मनोबल बढ़ाया। भैया-बहनों के उत्साह, श्रद्धा और भगवान शिव के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो गया। विद्यालय की यह पहल संस्कार निर्माण, भारतीय संस्कृति के संरक्षण तथा नई पीढ़ी में धार्मिक एवं सांस्कृतिक चेतना जागृत करने की दिशा में एक प्रेरणादायी कदम रही।

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