पंचायत चुनाव टलने से गांवों की सियासत ठंडी,दावेदारों की बढ़ी बेचैनी समर्पित
पंचायत चुनाव टलने से गांवों की सियासत ठंडी,दावेदारों की बढ़ी बेचैनी समर्पित पिछड़ा आयोग के गठन के बाद चुनावी तैयारियों पर लगा ब्रेक* *संभावित उम्मीदवारों ने जनता से बनाई दूरी* सुल्तानपुर। समर्पित पिछड़ा आयोग के गठन के बाद पंचायत चुनाव टलने से जिले की ग्रामीण राजनीति की रफ्तार थम गई है। महीनों से चुनाव की तैयारी में जुटे संभावित प्रत्याशियों की उम्मीदों पर फिलहाल पानी फिर गया है। गांवों में जो चुनावी हलचल जनवरी-फरवरी तक देखने को मिल रही थी, वह अब लगभग गायब हो चुकी है।जिले की अधिकांश ग्राम पंचायतों,क्षेत्र पंचायतों और जिला पंचायतों का कार्यकाल मई से जुलाई के बीच समाप्त हो चुका है। कार्यकाल खत्म होने के बाद सरकार ने पदेन अध्यक्षों को कार्यवाहक की जिम्मेदारी सौंपी है,लेकिन विकास कार्यों की स्वीकृति प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक जटिल हो गई है।अब कार्यों की संस्तुति का अधिकार राजपत्रित अधिकारियों के पास होने से कार्यवाहक प्रतिनिधियों की भूमिका सीमित हो गई है। पंचायत चुनाव समय पर होने की उम्मीद में ग्राम प्रधान और जिला पंचायत सदस्य पद के दावेदार लंबे समय से जनसंपर्क अभियान चला रहे थे। मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन तक उन्हें चुनाव समय पर होने की आस थी,लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में सरकार द्वारा समर्पित पिछड़ा आयोग के गठन की अधिसूचना जारी होने के बाद चुनाव टल गए और तैयारियों पर विराम लग गया।चुनाव स्थगित होने के बाद अधिकांश संभावित उम्मीदवारों ने भी जनता के बीच अपनी सक्रियता कम कर दी है। गांवों में अब केवल 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रहे नेताओं की आवाजाही अधिक दिखाई दे रही है।उधर जनवरी 2027 में 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवाओं को पंचायत चुनाव में मतदान का अवसर मिलेगा या नहीं,इसे लेकर भी संशय बना हुआ है।इस संबंध में अभी तक राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से कोई स्पष्ट निर्देश जारी नहीं किया गया है। यदि मतदाता सूची का पुनरीक्षण अभियान दोबारा शुरू होता है तो पंचायत चुनाव की सरगर्मी फिर तेज हो सकती है।इस बीच कई ग्राम पंचायतों में विपक्षी खेमे ने मौजूदा प्रधानों के कार्यों और वित्तीय लेन-देन का ब्योरा खंगालना शुरू कर दिया है।हर चुनाव की तरह इस बार भी चुनावी आहट के साथ शिकायतों और प्रार्थना पत्रों का दौर तेज होने लगा है।फिलहाल पंचायत चुनाव की तिथि को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।राजनीतिक जानकारों का एक वर्ग चुनाव नवंबर-दिसंबर में होने की संभावना जता रहा है,जबकि कुछ का मानना है कि पंचायत चुनाव अब 2027 विधानसभा चुनाव के बाद ही कराए जा सकते हैं।