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Pradhan Pravasi
Gorakhpur२१ मिनट पहले

*आईटीएम गीडा के बीटेक छात्रों ने बनाया स्मार्ट वायरलेस तीर, सेंसर के

*आईटीएम गीडा के बीटेक छात्रों ने बनाया स्मार्ट वायरलेस तीर, सेंसर के

*आईटीएम गीडा के बीटेक छात्रों ने बनाया स्मार्ट वायरलेस तीर, सेंसर के जरिए होगा रावण दहन* सहजनवा गोरखपुर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट (आईटीएम), गीडा, गोरखपुर के बीटेक द्वितीय वर्ष के छात्र आयुष और कृष्णदीप ने विज्ञान एवं तकनीक के समन्वय से रावण दहन के लिए एक विशेष स्मार्ट वायरलेस तीर तैयार किया है। इस तकनीकी नवाचार का उद्देश्य दशहरा पर्व पर रावण दहन के दौरान होने वाली संभावित दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करना और उत्सव को अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में प्रयास करना है। छात्रों ने इस परियोजना को बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक दशहरा पर्व की परंपरा से जोड़ते हुए आस्था और विज्ञान का अनूठा संगम प्रस्तुत किया है। छात्रों द्वारा विकसित इस स्मार्ट तीर में वायरलेस तकनीक और डिस्टेंस सेंसर का उपयोग किया गया है। इसकी कार्यप्रणाली के अंतर्गत तीर के निकट पहुंचने पर रावण के पुतले में लगा सेंसर निर्धारित वायरलेस सिग्नल को पहचानता है और उससे जुड़ी प्रणाली के माध्यम से दहन की प्रक्रिया शुरू करने के लिए संकेत देती है। इस प्रकार पारंपरिक तरीके से आग लगाने के बजाय नियंत्रित तकनीकी प्रणाली के माध्यम से रावण दहन की अवधारणा विकसित की गई है। छात्र कृष्णदीप ने बताया कि यह वायरलेस तकनीक पर आधारित एक विशेष तीर है, जिसमें दूरी पहचानने वाले सेंसर का उपयोग किया गया है। इसके एक हिस्से को रावण के पुतले में लगाया जाता है, जबकि तीर में सिग्नल भेजने वाला उपकरण लगाया गया है। निर्धारित दूरी के भीतर तीर के पहुंचने पर पुतले में लगा सेंसर सिग्नल को पहचानकर दहन प्रणाली को सक्रिय करने का संकेत देता है। उन्होंने बताया कि इस परियोजना में वायरलेस सिग्नल की दूरी को आवश्यकता के अनुसार निर्धारित करने की परिकल्पना की गई है। छात्र आयुष ने बताया कि दशहरा पर्व पर विभिन्न स्थानों पर रावण के पुतलों का दहन किया जाता है। कई बार पटाखों, आग और भीड़ के कारण दुर्घटनाएं होने की आशंका रहती है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए दोनों छात्रों ने सेंसर आधारित स्मार्ट तीर विकसित करने का प्रयास किया। उन्होंने बताया कि इस तकनीक का प्रारंभिक परीक्षण चार फुट के रावण के पुतले पर किया गया है। भविष्य में आवश्यक तकनीकी परीक्षण और सुरक्षा मानकों के अनुरूप इसमें सुधार करके इसे बड़े आकार के पुतलों के लिए भी उपयोगी बनाने की दिशा में कार्य किया जा सकता है। छात्रों के अनुसार, इस परियोजना को तैयार करने में सात दिन का समय लगा। संस्थान के निदेशक डॉ. एन. के. सिंह ने छात्रों के इस नवाचार की सराहना करते हुए प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों द्वारा पारंपरिक आयोजनों से जुड़ी समस्याओं का तकनीकी समाधान तलाशना उनकी रचनात्मक सोच, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नवाचार की भावना को दर्शाता है। ऐसे प्रयास विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करने के साथ-साथ समाजोपयोगी तकनीक विकसित करने के लिए प्रेरित करते हैं। संस्थान के अध्यक्ष नीरज मातनहेलिया, सचिव श्याम बिहारी अग्रवाल, कोषाध्यक्ष निकुंज मातनहेलिया, संयुक्त सचिव अनुज अग्रवाल सहित संस्थान के सभी शिक्षकों ने छात्रों के प्रयासों पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी। प्रबंधन ने कहा कि विद्यार्थियों में इस प्रकार की नवाचारपूर्ण सोच को प्रोत्साहित करना संस्थान की प्राथमिकताओं में शामिल है। ऐसे प्रोजेक्ट तकनीकी शिक्षा को व्यावहारिक अनुभव से जोड़ने के साथ-साथ विद्यार्थियों में समस्या-समाधान, टीमवर्क और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना भी विकसित करते हैं।

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